सहारनपुर। परचम संस्था द्वारा उर्दू में बच्चों का अदब विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया।
अंबाला रोड स्थित एक सभागार में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ हाजी फजलुरर्हमान ने शमा रोशन कर किया। सेमिनार में विभिन्न विद्यालयों के प्रोफेसर ने भाग लिया। नई दिल्ली से आए मुख्य अतिथि साइंटिस्ट मोहम्मद खलील ने कहा कि भारत में बाल साहित्य के सृजन का इतिहास ढाई से तीन हजार वर्ष पुराना है। उर्दू बाल साहित्य ने भारत में बच्चों के बीच प्यार, सम्मान और राष्ट्र प्रेम का संदेश दिया है। तकनीकि वायरस इतना वायरल हो चुका है कि अब मसला बच्चों की मासूमियत बचाने का है। अफजल मंगलौरी ने कहा कि उर्दू एक मीठी जुबान है, जो लोगों को दिलों को जोड़ने काम करती है। प्रोफेसर राशिद अजीज और वजाहत शाह ने भी विचार रखे। सेमिनार का संचालन संयोजिका डॉ. कुदसिया अंजुम ने किया। इस अवसर पर अजय कुंदन, अनीस, डॉ. शहनाज चांदनी, फात्मा, मुख्यात खान, करीम बानो, रवि मौर्य, वीपी पोपली, जमील, गजनफर आदि मौजूद रहे।