सहारनपुर। बृहस्पतिवार की आधी रात को हुई दुर्घटना के बाद अर्पित 23 मिनट तक सड़क पर पड़ा तड़पता रहा। वह यदि समय पर अस्पताल पहुंच जाता तो जान बच जाती। लोग हाथ जोड़कर पुलिस कर्मियों से अस्पताल पहुंचाने की मिन्नतें करते रहे, लेकिन पुलिस कर्मियों ने उनकी एक नहीं सुनी। पुलिस कर्मी कहते रहे कि उनकी गाड़ी गंदी हो जाएगी, फिर वह पूरी रात कैसे बिताएंगे ?
लिंक रोड पर बेरीबाग की ओर से मंगल नगर की ओर मोटरसाइकिल से अर्पित और सन्नी आ रहे थे। मोटरसाइकिल तो अर्पित की थी, लेकिन चला रहा था सन्नी। बाइक की गति तेज थी, जिससे वह अनियंत्रित होकर खंभे से टकरा गई। दोनों किशोर नाले में जा गिरे और घायल हो गए। लोगों ने तुरंत डायल 100 को सूचना दी और किशोरों को नाले से बाहर निकाला। दोनों सड़क पर तड़प रहे थे। खून में लथपथ सन्नी कुछ देर तड़प कर बेहोश हो गया, जबकि अर्पित पुलिस कर्मियों के सामने 23 मिनट तक तड़पता रहा। पुलिस कर्मियों ने उन्हें यह कहकर अस्पताल ले जाने से मना कर दिया कि उनकी गाड़ी गंदी हो जाएगी, फिर वे रात कहां बैठकर काटेंगे। अर्पित के पिता राकेश खुराना ने रोते हुए बताया कि चिकित्सकों ने उसे बताया कि 15-20 मिनट पहले उसका बेटा अस्पताल पहुंच जाता तो उसे बचा लेते। पुलिस कर्मियों की वजह से ही उसके बेटे की जान गई है। मेरे बेटे को मार डाला। मेरा तो परिवार की बर्बाद हो गया। ऐसे लोगों को सजा मिलनी ही चाहिए।