यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन से जुड़े बैंक कर्मियों और अधिकारियों ने बैंक शाखाओं पर तालाबंदी कर हड़ताल की। बैंकों की हड़ताल से ग्राहकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। जनपद में करीब 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का लेनदेन ठप रहा।
मंगलवार को यूएफबीयू के आह्वान पर जनपद की लगभग 300 बैंक शाखाओं के कर्मचारी और अधिकारी हड़ताल में शामिल हुए। बैंककर्मी सुबह कोर्ट रोड स्थित भारतीय स्टेट बैंक पर इकट्ठा हुए। फोरम के जिला संयोजक सुनील गुप्ता ने बताया कि बैंककर्मी किस तरह सरकार के सुधार के तथाकथित उपायों के विरुद्घ पिछले दो दशकों से लड़ रही है।उन्होंने कहा कि सरकार का ये सुधार देश की आम जनता के साथ साथ श्रमशक्ति के हितों के विरुद्घ भी है।
जिलाध्यक्ष राजीव जैन ने बताया कि 1991 से सरकारों द्वारा हर प्रयास सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं को निजी हाथों में और विदेशी निवेशकों को सौंपने के लिए किए जा रहे हैं। एसबीआईएसए के सहायक महासचिव अरविंद गुप्ता ने कहा कि सरकार द्वारा जिस तरह श्रम कानूनों में संशोधन कर उनको विदेशी निवेशकों के अनुरूप बनाने के प्रयास किये जा रहे हैं, इसके दूरगामी परिणाम बहुत घातक होंगे।
धरने को एसबीआई स्टाफ एसोसिएशन के क्षेत्रीय सचिव मनमोहन सूद, एनसीबीई के सचिव संजय शर्मा, सुरेंद्र कुमार, उपेंद्र शर्मा, प्रदीप गुप्ता, अशोक कुमार, राहुल कपिल, कुलदीप सिंह आदि ने संबोधित किया।
इस अवसर पर वीर कुमार जैन, विष्णु शेखर, शांति कुमार, संजीव शर्मा, अतुल चोपड़ा, अजय गुप्ता, नावेद अली, शिवा, डीके दीक्षित, प्रदीप शर्मा, प्रीति चड्ढा, कविता सैनी, सतीश छाबड़ा, महेंद्र सिंह, शाहीन, परसराम, अतुल सिंघल, रीना जैन आदि मौजूद रहे।
बैंकों में रही हड़ताल और ग्राहक हुए बेहाल
देवबंद। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के आह्वान पर मंगलवार को बैंक यूनियन के आह्वान पर नगर एवं देहात क्षेत्र के अधिकांश बैंकों में ताले लटके रहे। जानकारी न होने के चलते लोग बैंकों में पहुंचे थे। बैंक बंद देख लोग नकदी के लिए एटीएम पहुंचे, लेकिन उनमें नकदी नहीं थी। इस वजह से ग्राहकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बैंकों से नकदी नहीं मिलने की वजह गांवों देहात से आए लोग खरीदारी नहीं कर सके।
इन मांगों को लेकर हुई हड़ताल
- नोटबंदी के दौरान कर्मचारी, अधिकारियों पर अधिक कार्य कराये जाने पर कोई मुआवजा नहीं देना।
- केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बराबर ग्रेच्यूटी का भुगतान करना।
- वेतन समझौता जल्द लागू करने के संबंध में।
- मृतक आश्रितों के परिवार में से नौकरी लगवाने के संबंध में।
- केंद्रीय कर्मचारियों के समान ही बैंक कर्मचारियों को भत्ते एवं पेंशन देने के संबंध में।