-यात्री नहीं मिलने से कई रूटों पर कम हो सकती है बसों की संख्या
-सहारनपुर से लखनऊ जाने के लिए बहुत कम ही मिलते है यात्री
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। परिवहन निगम ने रोडवेज बसों में 25 यात्री का मानक तो तय कर दिया, लेकिन इससे यात्रियों की परेशानी बढ़ेगी। क्योंकि कई रूट ऐसे हैं, जहां पर यात्री ही नहीं मिलते। ऐसे में बसों का बेहद कम हो सकती है। सबसे खराब स्थिति सहारनपुर से लखनऊ की है। इस पर बस को 25 यात्री नहीं मिल पाते।
सहारनपुर परिवहन निगम परिक्षेत्र के छह डिपो में 607 रोडवेज बसों का बेड़ा है। शामली और गंगोह डिपो से अनुबंधित बसें संचालित होती हैं, जबकि सहारनपुर, छुटमलपुर, खतौली और मुजफ्फरनगर डिपो से अनुबंधित बसों के साथ निगम की बसें चलती हैं। पिछले कुछ महीनों से परिवहन निगम राजस्व को लेकर उभर नहीं पा रहा है। स्थिति यह है कि अगस्त में रीजन ने 80 फीसदी ही राजस्व प्राप्त किया था। इसमें सबसे खराब स्थिति सहारनपुर डिपो की रही, जिसने 76 प्रतिशत राजस्व दिया, जबकि इस डिपो में सबसे ज्यादा 198 बसों का बेड़ा है। सबसे अधिक 83 फीसदी राजस्व मुजफ्फरनगर डिपो का रहा।
इसे लेकर परिवहन निगम ने बसों में सवारियों के मानक तय कर दिए हैं, जो यात्रियों को मुश्किलें बढ़ाएगा। सहारनपुर से लखनऊ, लुधियाना, अंबाला, बड़गांव, गंगोह, नानौता आदि ऐसे रूट हैं, जिन पर बहुत कम यात्री निकलते हैं। इनके अलावा आगरा, अलीगढ़ रूट के लिए भी अड्डे से बस को तय मानक के अनुसार यात्री नहीं मिलते। ऐसी स्थिति बसें खड़ी हो सकती है। क्योंकि एक रूट पर कई-कई बसें संचालित होती है। हर 10 से 15 मिनट बाद बसों को रवाना किया जाता है। इतनी जल्दी बस को 25 सवारी नहीं मिलती।
वर्जन
राजस्व को बढ़ाने के लिए मानक निर्धारित किए हैं। 25 यात्रियों से कम पर रोडवेज बस संचालित नहीं होगी। सभी सहायक क्षेत्रीय प्रबंधकों और यातायात निरीक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वह इस पर ध्यान रखें।
- गौरव पांडेय, सेवा प्रबंधक एवं प्रभारी क्षेत्रीय प्रबंधक, परिवहन निगम