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25 दिन बाद भी बैंकों से नहीं छटी भीड़

Sun, 04 Dec 2016 12:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देवबंद
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देवबंद में बैं‌क पर कैश निकालने के लिए लगी ग्राहकों की भीड़। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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नोट बंदी के कारण बैंकों के सामने 25 दिन से लगी लोगों की भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही है। शनिवार को भी नगर के अधिकांश बैंकों के बाहर लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली। कई जगहों पर तो लोग अंदर घुसने को पुलिसकर्मियों से उलझते दिखाई दिए।
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बैंकों में कैश पर्याप्त मात्रा में न आने से लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। यह हाल देवबंद का ही नहीं बल्कि देहात के बैंकों में भी यही स्थिति देखी जा रही है। कई-कई दिन बाद कैश आने से लोगों की सुबह से बैंकों के बाहर भीड़ जुटने लगती है। कुछ को घंटों लाइनों में लगने के बाद कैश मिलता है तो कुछ टोकन पाने के बावजूद निराश होकर घर लौट रहे हैं।

जो अगले दिन फिर से इसी आस में बैंक पहुंचते हैं शायद आज उनका नंबर आ जाएगा। शनिवार को पीएनबी और स्टेट बैंक के बाहर खड़े लोगों ने बताया कि शुक्रवार को भी लाइन में खड़े होने के बावजूद कैश नहीं मिला था। शनिवार को भी सुबह छह बजे से वह लाइन में खड़े हैं।
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नकदी न होने से परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। कई बैंकों के बाहर तो शनिवार को भी कैश नहीं होने के बोर्ड टंगे नजर आए। डाकघरों में तो स्थिति इससे भी विकट है। नकदी नहीं है सिर्फ रुपये ही जमा हो रहे हैं। कुछ लोगों का आरोप था कि डाक कर्मी अपने चहेतों को ही रुपये दे रहे हैं। 

तीतरो। पंजाब नेशनल बैंक में शरारती तत्वों के जबरदस्ती भीतर घुस जाने को लेकर लाइन में खडे़ लोगों ने जमकर हंगामा किया। इस दौरान हुई खींचतान में कई महिलाएं गिरकर चोटिल हो गई। आरोप है पुलिसकर्मी बैंक में बैठे तमाशबीन बने रहे। पंजाब नैशनल बैंक पर सुबह पांच बजे से ही लाइन लगनी शुरू हो जाती है।

बैंक खुलने तक लंबी-लंबी कतारें लग जाती है। बैंक ने शनिवार सोमवार तीतरो और बाकी चार दिन ग्रामीण क्षेत्र के ग्राहकों लिए दिन निर्धारित कर रखा है। शनिवार को कुछ लोग जब शार्टकट से भीतर घुस गए। इस पर लाइन में खड़े लोगों ने हंगामा कर दिया। इस दौरान हुई खींचतान में कई महिलाएं गिरकर चोटिल हो गईं।

बबीती देवी, रमेशो रानी, मेमता, असगर, मुनफैत, आदिल, जरीफ, धर्म सिंह, रजोवती कमलेश, राजेंद्र, दिलशाद, ओमकुमार, सरिता देवी, कांता देवी आदि ने कहा शरारती तत्व शार्टकट रास्ते से भीतर जाकर आसानी कैश ले आते हैं, जबकि गरीब जनता खड़ी रहती है। पुलिस कर्मी बैंक के भीतर बैठ जाते हैं, जबकि बाहर लोग हंगामा करते रहते हैं ग्रामीणों ने पुलिस मुस्तैद कराने की मांग की है। 
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