देवबंद (सहारनपुर)। यूपी शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने इस बार देवबंद को आतंक का चेहरा बताया है। उन्होंने कहा, ‘इसी छवि के कारण देवबंद बदनाम हो रहा है।’ दारुल उलूम और यहां से जारी फतवों पर भी उन्होंने कई सवाल उठाते हुए देवबंद का नाम बदलने की मांग की।
फोन पर बातचीत में रिजवी ने कहा कि देवबंद की पहचान आतंक के चेहरे के रुप में बन चुकी है। इसकी एक वजह यहां से जारी होने वाले फतवे भी हैं, जिनके कारण पूरे मुल्क के मुसलमानों पर छींटाकशी होती है। जहां जरूरत होती है, वहां डर की वजह से उलमा फतवे नहीं देते। आपत्तिजनक फतवे इनकी आदत बन गए हैं। इनके फतवों को मुस्लिम समाज ही नहीं मानता है। देवबंदी और दूसरी सुन्नी जमातों में बहुत अंतर है। पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि मुझे पता है, नाम बदलने से कुछ नहीं होगा, लेकिन इन लोगों (उलमा) को तो शर्म आएगी।
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‘मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड हिंदुओं को सौंपे जन्मभूमि’
देवबंद। वसीम रिजवी ने राम मंदिर के लिए हिंदुओं को भूमि दे देने का ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को प्रस्ताव भेजा है। उन्होंने कहा कि इस्लाम ने कई अहम मामलों में समझौते किए हैं। जमीन के लिए देश के 20 करोड़ से ज्यादा मुसलमानों को खतरे में डालना समझदारी नहीं है। जमीन छोड़कर हम 99 प्रतिशत आबादी का दिल जीत सकते हैं। रिजवी के मुताबिक, बोर्ड अध्यक्ष मौलाना राबे हसनी नदवी को प्रस्ताव भेजा है।
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तवज्जो देने लायक नहीं हैं रिजवी : फारूकी
देवबंद। फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मौलाना मुफ्ती अरशद फारूकी ने कहा कि तमाम बड़े शिया उलमा ही वसीम रिजवी को गैर जिम्मेदार इंसान करार दे चुके हैं। जब उनके लोग ही उनकी बातों पर ध्यान नहीं देते और उन्हें जिम्मेदार व्यक्ति नहीं मानते हैं तो फिर कोई दूसरा उन्हें तवज्जो क्यों दे? हमें भी रिजवी के बयानों पर किसी भी तरह से ध्यान देने की जरूरत नहीं है।