सहारनपुर। लचर शिक्षा व्यवस्था से हर कोई वाकिफ है, मगर राजकीय इंटर कॉलेजों के हाल जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे। बता दें कि जनपद के कुल 15 राजकीय इंटर कॉलेजों में से 14 में प्रधानाचार्य ही नहीं हैं। यानी यह विद्यालय बिना नेतृत्व के संचालित हो रहे हैं। शिक्षकों के पद भी 50 फीसदी से अधिक खाली ही पड़े हैं। विभागीय स्तर से शिक्षकों की डिमांड बनाकर शासन को भेजी जाती है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती ।
जिले में कुल 49 राजकीय माध्यमिक विद्यालय हैं। इनमें 15 इंटर कॉलेज, 33 हाई स्कूल और एक अभिनव विद्यालय शामिल है, जो सीबीएसई से संबद्ध है। कुल 49 विद्यालयों में नौ विद्यालय बालिकाओं के हैं, जबकि शेष में को-एजुकेशन है। विभागीय सूत्रों से मिले आंकड़ों के अनुसार जनपद के कुल 15 राजकीय इंटर कॉलेजों में से मात्र एक कॉलेज में ही प्रधानाचार्य कार्यरत हैं, जबकि 14 में यह महत्वपूर्ण पद खाली पड़े हैं। यह स्थिति हाल फिलहाल में नहीं बनी है, बल्कि वर्षों से प्रधानाचार्यों की कुर्सी खाली होती आ रही है। समय-समय पर विभागीय अधिकारी शासन के कानों में शिक्षकों की कमी होने की बात पहुंचाते रहे हैं, मगर अभी तक सुनवाई नहीं हो सकी है। प्रवक्ताओं की बात करें तो 15 राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रवक्ताओं के 245 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 135 शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि 110 पद खाली पड़े हैं। राजकीय हाई स्कूलों की बात करें तो वहां प्रवक्ताओं के 228 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से मात्र 88 पद भरे हुए हैं, जबकि 140 पद रिक्त हैं।
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अनेक विषयों के शिक्षक न होने से पढ़ाई बाधित
राजकीय विद्यालयों में सबसे अधिक कमी गणित और विज्ञान विषयों के शिक्षकों की है। ऐसी स्थिति में अनेक विद्यालयों में उक्त विषय की पढ़ाई बाधित हो रही है। कक्षा नौ से लेकर 12वीं तक के बच्चों को बाहर ट्यूशन लगवाकर काम चलाना पड़ रहा है। विभागीय सूत्रों ने बताया कि हिंदी, सामाजिक विज्ञान समेत कुछ विषय ऐसे हैं, जिन्हें कोई भी शिक्षक पढ़ा सकता है, मगर गणित और विज्ञान ऐसे विषय हैं, जिनके लिए विषय विशेषज्ञ शिक्षक होना जरूरी है। अनेक स्कूलों में पीटीए के तहत शिक्षक रखे गए हैं, मगर उनकी संख्या भी नाकाफी है।
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राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों और प्रधानाचार्यों की नियुक्ति तथा पदोन्नति आदि सब लोक सेवा आयोग से होती है। जनपद के विद्यालयों में शिक्षकों की स्थिति से शासन को समय-समय पर अवगत कराया जाता रहा है। शासन के द्वारा लोक सेवा अयोग को पूरी डिटेल भेजी हुई है। लोक सेवा आयोग शिक्षकों की भर्ती के लिए परीक्षा कराने की तैयारी में है। हमें उम्मीद है कि सितंबर 2018 तक राजकीय माध्यमिक विद्यालयों को नए शिक्षक मिल जाएंगे।
डॉ. अरुण कुमार दुबे, डीआईओएस।