याद कर खडे़ हो जाते हैं रोंगटे
सहारनपुर। लोकतंत्र सेनानियों ने कहा कि 26 जून 1975 को इमरजेंसी लगाकर न सिर्फ लोकतंत्र का गला घोंट दिया था बल्कि आजादी के बाद यह देश का पहला काला अध्याय था। नागरिकों पर ऐसे अत्याचार किए गए किस याद करके ही रोंगटे खडे़ हो जाते हैं।
जेलों में डालकर किया गया अत्याचार
लोकतंत्र सेनानी मोर्चा के जिला संयोजक पूर्व विधायक सुखबीर सिंह पुंडीर ने कहा कि इमरजेंसी के वक्त लोगों को जेलों में डालकर उन पर अत्याचार किए गए। वह वक्त देश के लिए सबसे खराब समय था, जिसे याद कर आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं। तब उन्होंने सत्याग्रह आंदोलन चलाया था, जो समाचार पत्र इमरजेंसी का विरोध कर रहे थे, उनके मालिकों और संपादकों को जेल में बंद किया जा रहा था। भारत के इतिहास में यह सबसे काले दिन थे। लोकतंत्र सेनानियों को किसी भी सरकार ने याद नहीं किया। लेकिन अब भाजपा 26 जून को उन्हें सम्मान देने का काम कर रही है।
देश में व्याप्त हो गया था अंधेरा
गांव केंदुकी के लोकतंत्र सेनानी जसपाल सिंह त्यागी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 26 जून 1975 में देश में इमरजेंसी लगाकर लोकतंत्र का गला घोंट दिया था। उस समय ऐसा लगता था कि जैसे देश में अंधेरा व्याप्त हो गया।
आजादी पर लगा दिया था प्रतिबंध
कुरड़ी निवासी लोकतंत्र सेनानी सुभाष चंद त्यागी ने कहा कि इमरजेंसी भारत का पहला काला अध्याय था, तब सबके मुंह बांधने का प्रयास किया जा रहा था। अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त होने के बाद मिली आजादी पर प्रतिबंध लग गया था।
आवाज उठाने वालों को किया था प्रताड़ित
भायला के पंचम सिंह ने कहा कि इंदिरा गांधी ने देश की अर्थव्यवस्था के साथ आजादी को भी खत्म कर दिया था। जनता पर अत्याचार किए गए, जिससे लोगों का जीना मुहाल हो गया था। जबरन नसबंदी कराई गई, जो भी सरकार के खिलाफ आवाज उठाता था, उसे प्रताड़ित किया जा रहा था।
स्वयंभू सरकार चला रहे थे अधिकारी
कुरड़ी के रमेश चंद ने कहा कि इमरजेंसी में अधिकारी स्वयंभू सरकार चलाकर देश की जनता को जीते जी मार रहे थे, जिसे भी देखा उसे पकड़कर जेल में बंद किया जा रहा था।