सहारनपुर। प्रधानमंत्री बीमा योजना का लाभ पाने को एक किसान 15 माह से भटक रहा हैं। मुख्यमंत्री पोर्टल से उसे दो बार काम होने का जवाब दिया जा चुका है। फूटी कूड़ी मिलना तो दूर उल्टा किसान से सुविधा शुल्क मांगा जा रहा है। हर तरफ दस्तक देने के बाद पीड़ित की कोई सुनने को तैयार नहीं है। पीड़ित को गुजरात का मुख्यमंत्री रहते नरेंद्र मोदी ने 2013 में सर्वश्रेष्ठ किसान का पुरस्कार दिया था।
नुकुड़ के रनियाला दयालपुर निवासी सत्यपाल की पहचान प्रगतिशील किसान के रूप में है। वह देश में डेढ़ दर्जन से अधिक बार पुरस्कृत हो चुका है। सत्यपाल ने 2015 में शुरू हुई प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत अपनी पत्नी कौशल देवी समेत परिवार के सदस्यों का बीमा कराया था। पंजाब नेशनल बैंक के खाते से 330 रुपये सालाना किश्त खाते से कटती रही। इसी बीच चार फरवरी 2017 को सत्यपाल की पत्नी कौशल देवी की मृत्यु हो गई थी। बीमा राशि का लाभ लेने के लिए सत्यपाल ने पंजाब नेशनल बैंक में दावा पेश किया। संबंधित पत्रावली के साथ कौशल देवी की मृत्यु का प्रमाण पत्र लगाया था। प्रगतिशील किसान उस दिन से बैंक, प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर काट रहा है। किसान सत्यपाल सिंह का आरोप है कि उसके द्वारा मुख्यमंत्री पोर्टल पर दो बार शिकायत की गई। गंभीर बात यह है कि दोनों बार संबंधित से समस्या हल कराने का जवाब दिया गया। आरोप है कि तमाम पत्रावली जमा कराने के बाद भी सुविधा शुल्क की मांग की जा रही है। 15 माह से भटक रहे किसान सत्यपाल सिंह ने प्रधानमंत्री कार्यालय में अर्जी भेजी है। कहा कि वह पहले से कर्जदार है। वह रिश्वत देने की स्थिति में नहीं है।