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दलितों के निशाने पर रहे मोदी और योगी

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बंद के जरिए दलित संगठनों ने दिखाया शक्ति प्रदर्शन
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सहारनपुर। दलित संगठनों का आंदोलन सु्प्रीम कोर्ट के एससी/एसटी एक्ट में संशोधन के विरोध में था, मगर दलित संगठनों के निशाने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रहे। वैसे तो आंदोलन गैर राजनीतिक था, मगर मोदी और योगी के खिलाफ हुई नारेबाजी विशुद्ध राजनीतिक नजर आई। बंद के जरिए दलित संगठन युवाओं और महिलाओं को साथ जोड़कर अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने में कामयाब रहा है, मगर नेतृत्व की कमी के कारण आंदोलन कई बार भटकता नजर आया।
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एससी/एसटी एक्ट संशोधन के विरोध में भारत बंद के दौरान दलित अपनी एकता का संदेश देने में कामयाब रहे हैं। काफी दिनों से दलितों के तमाम संगठन बंद को सफल बनाने में जुटे थे। सोमवार को गली-मोहल्लों से बंद समर्थक जुलूस के रुप में घंटाघर पहुंचने शुरू हुए। दोपहर तक हजारों की संख्या में जुटे बंद समर्थकों ने अपनी शक्ति प्रदर्शित की। बंद समर्थकों में युवाओं के साथ महिलाओं की अच्छी-खासी भागेदारी थी, जो आंदोलन में अग्रणी रही। कुछ युवाओं ने बंद के नाम पर शहर की शांति भंग करने की कोशिश की, मगर लोगों की सूझ-बूझ की वजह से स्थिति संभल गई। पूरे आंदोलन के दौरान एससी/एसटी एक्ट के संशोधन के बजाए आंदोलनकारियों में प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी के खिलाफ ज्यादा आक्रोश नजर आया। बंद समर्थकों में आरक्षण को लेकर सरकार के खिलाफ ज्यादा संदेश था। प्रदर्शनकारियों की नारेबाजी में मोदी और योगी के अलावा आरक्षण खत्म होने का डर भी नजर आया। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा दलितों को बसपा के पाले से खींचने में कामयाब रही थी। नतीजा यह हुआ था कि प्रदेश से बसपा का पूरी तरह सफाया हो गया था। निसंदेह आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर दलितों की यह एकजुटता भाजपा के लिए शुभ संकेत नहीं है।
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