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अंजाने में माता-पिता ने खतरे में डाल दी मासूमों की जिंदगी

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सहारनपुर। एचआईवी पॉजिटिव माता-पिता की असावधानी के चलते सहारनपुर में 20 बच्चे अब हर दिन जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। एआरटी सेंटर में चिह्नित इन बच्चों के माता-पिता से यह संक्रमण उन बच्चों में आया है। समय रहते माता-पिता ने अपनी जांच कराई होती तो इन बच्चों की जिंदगी खतरे में नहीं पड़ती। वर्ष 2017 में 51 नए एड्स रोगी मिले हैं। इनमें बच्चों की संख्या सबसे अधिक 20 है। बाकी अलग-अलग उम्र के लोग शामिल हैं। इन बच्चों में एड्स होने के कारण माता-पिता के भी एचआईवी पॉजिटिव होने की बात सामने आ रही है। स्वास्थ्य विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुुरू कर दी है।
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एड्स की रोकथाम के लिए जनपद में कई अभियान चलाए गए, लेकिन इस रोग से पीड़ित लोगों में कमी आने के बजाय संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। 2016 की अपेक्षा 2017 में एड्स रोगियों की संख्या 258 से बढ़कर 309 हो गई है। पिछले पांच वर्षों में जनपद में एड्स रोगियों की संख्या 1354 हो चुकी है। सीएमओ बीएस सोढ़ी का कहना है कि एड्स फैलने के तीन मुख्य कारण है। इनमें शारीरिक संबंध बनाना, रक्त द्वारा और मां से शिशु में संक्रमण होना है। वर्ष 2017 में जनपद में मिले 51 मरीजों का रजिस्ट्रेशन कर उपचार किया जा रहा है। इनमें 20 बच्चे एड्स रोगी मिले हैं। जांच में सामने आया है कि इनके माता-पिता एचआईवी पॉजिटिव रहे हैं। एड्स की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग विभिन्न अभियान चला रहा है।
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यह एड्स बचाव के उपाय
सहारनपुर। चिकित्सकों के अनुसार एड्स एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में तभी फैलता है, जब लापरवाही बरती जाती है। रक्तदान के समय एड्स का संक्रमण न हो इसके लिए रक्तदाता के खून की जांच अति आवश्यक है। रक्त लेने और देने के लिए जिन सुइयों का प्रयोग हो रहा है, वह नई हो। रक्तदान के समय कर्मचारियों को दस्ताने पहनना, इंजेक्शन से पहले और बाद में साबुन और पानी से हाथ धोना चाहिए। इसके अलावा मां से शिशु में संक्रमण हो सकता है। यदि एक एचआईवी से पीड़ित स्त्री गर्भवती हो जाती है तो नवजात शिशु के संक्रमित होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। यह संक्रमण गर्भ, प्रसव या स्तनपान द्वारा हो सकता है। बचाव के लिए अवांछित गर्भ को टाला जाए। गर्भ और प्रसव के दौरान माता को एंटीरेट्रोवाइरल दवाएं दी जाएं। जिससे शिशु के संक्रमित होने का खतरा कम हो जाता है।
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एड्स का इलाज संभव
सहारनपुर। सीएमओ बीएस सोढ़ी का कहना है कि एड्स का इलाज संभव है। इसके लिए दवाएं उपलब्ध हैं। जिन्हें एआरटी यानि एंटी रेट्रोवाइरल थेरेपी दवाई के नाम से जाना जाता है। इनके सेवन से बीमारी थम जाती है और एड्स पीड़ित व्यक्ति जिंदगी जीने में कठिनाई नहीं होती है। इन दवाओं का इस्तेमाल जीवन भर करना पड़ता है।
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