सहारनपुर। परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बीते एक साल में इस बार 21 हजार विद्यार्थी घट गए हैं। विद्यालयों का कायाकल्प और विद्यार्थियों को परिषदीय विद्यालयों से जोड़ने के लिए चलाई जा रही मिड-डे मील, निशुल्क यूनिफॉर्म, किताबें आदि की योजना के बावजूद संख्या का गिरना विभागीय व्यवस्था पर प्रश्न चिह्न खड़े कर रहा है।
जनपद में 1,438 परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। इनमें बीते वर्ष यानी सत्र 2022-23 में कक्षा एक से आठ तक के पंजीकृत विद्यार्थियों की संख्या 2.42 लाख थी। तब शिक्षा मित्र, शिक्षक और विभागीय अधिकारियों के साथ ही मंडलायुक्त ने आउट ऑफ स्कूल बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए काम किया था। मंडलायुक्त ने खुद खलासी लाइन क्षेत्र से बड़ी संख्या में बच्चों को चिह्नित करते हुए रेलवे कॉलोनी स्थित विद्यालय में पंजीकृत कराया था। नतीजा पूरे विभाग और शिक्षकों को भी लगकर पंजीकरण कराने पड़े थे। यहां तक कि पहाड़ों में रहने वाले वन गुर्जनों तक के बच्चों को चिह्नित कर शिविर लगाकर पंजीकरण किए गए थे, लेकिन इस बार पंजीकरण अभियान उस स्तर का नहीं रहा है, जिसका नतीजा यह रहा है कि संख्या गिरकर 2.21 लाख रह गई है। यानी 21 हजार छात्र कम हुए हैं।
कोरोना की वजह से बढ़ी थी संख्या
कोरोना काल में आर्थिक तंगी के कारण अनेक अभिभावक निजी विद्यालयों में फीस जमा नहीं करा पाए थे। ऐसे में उन्होंने कोरोना के बाद विद्यालय खुलने पर निजी विद्यालय छोड़कर अपने बच्चों का पंजीकरण परिषदीय विद्यालयों में करा लिया था। विभाग भी इस बात को मानता है। जिला समन्वयक कृपाल मलिक ने बताया कि जो विद्यार्थी निजी विद्यालय छोड़कर आए थे वह धीरे-धीरे निजी विद्यालयों में लौट गए हैं, जिसकी वजह से संख्या गिरी है।
यूडायस से खत्म हुआ फर्जीवाड़ा
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. विनीता ने बताया कि पूर्व के वर्षों में कुछ छात्र लाभ लेने के लिए दो-दो जगह पंजीकरण करा लेते थे, लेकिन इस साल से यूडायस भरा गया है, जिसमें प्रत्येक पंजीकृत छात्र का आधार नंबर लिया गया है। इससे फर्जी पंजीकरण खत्म हुए हैं। साथ ही कोरोना के समय आए विद्यार्थियों में से कुछ वापस भी गए हैं, लेकिन इस बार भी पंजीकरण अभियान हमारा कमजोर नहीं रहा है।