शहीद मातादीन वाल्मीकि को दी श्रद्धांजलि
सहारनपुर। भारतीय वाल्मीकि धर्म समाज (भावाधस) ने रेलवे स्टेशन परिसर में जिला वाल्मीकि सभा के कार्यालय पर प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के शहीद मातादीन को श्रद्धांजलि अर्पित की।
भावाधस के राष्ट्रीय संचालक वीर श्रेष्ठ अजय बिरला ने कहा कि वाल्मीकि समाज का नाम इतिहास में स्वर्ण अक्षर में दर्ज है, क्योंकि 10 मई 1857 की क्रांति के सूत्रधार शहीद मातादीन हैं। मातादीन वाल्मीकि अंग्रेज सेना में खलासी के पद पर कार्यरत थे, जबकि मंगलपांडे सिपाही थे। दोनों ही कुश्ती के खिलाड़ी थे। भावाधस के प्रांतीय अध्यक्ष प्रवीण सौदाई ने कहा कि भारतीय इतिहास में वाल्मीकि समाज का एक बार नहीं, कई कई बार योगदान रहा है, लेकिन इतिहासकारों ने वाल्मीकि समाज का इतिहास पन्नो में उल्लेख नहीं किया। प्रांतीय महामंत्री डाक्टर दिनेश कल्याण ने कहा कि वाल्मीकि समाज ही नहीं, बल्कि समस्त अनुसूचित समाज का अंग्रेज हुकूमत के खिलाफ बड़ा योगदान रहा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला वाल्मीकि सभा के मुख्य संरक्षक बिशंबर सिंह ने की। संचालन आनंद कुमार बिरला ने किया। इस दौरान सतीश ढिलोड, जिला वाल्मीकि सभा के अध्यक्ष ब्रजमोहन सूद, रोहित चनालिया, रविंद्र कल्याण, पवन कुमार, राजन, रमन, मुकेश बिरला, रोहित, गौरव कुमार, राजू सागर, दीपक, विकास, मोनी, राजेंद्र भगत, अजय कुमार और रमेश डबराल आदि मौजूद रहे।