सहारनपुर। नारी दूसरों की मोहताज नहीं है। वह हर क्षेत्र में खुद को साबित कर चुकी है। फिर चाहे कोई भी क्षेत्र क्यों न हो। सरकारी नौकरी से लेकर सामाजिक कार्य हों या फिर खेल, साहित्य, कारोबार और राजनीति में महिलाओं ने अपनी पहचान बनाई है। स्वयं को पहचानने से ही आत्मबल मिलेगा और नारी का सम्मान बढ़ेगा।
यह विचार शुक्रवार को अमर उजाला फाउंडेशन की तरफ से शहर में कोर्ट रोड स्थित जनता रोकिंग वेज रेस्टोरेंट में नारी का सम्मान विषय पर फोकस ग्रुप का आयोजन किया गया, जिसमें डाक्टर, बिजनेस वुमेन, सामाजिक कार्यकर्ता, अधिवक्ता और घर में रहते हुए अपनी जिम्मेदारी निभाने वाली महिलाओं ने बेबाकी से विचार व्यक्त किए। गौतम ज्वेलर्स की संचालिका नीलम सिंघल ने कहा कि व्यापार में पति गौतम सिंघल के साथ कार्य करने से मनोबल बढ़ा, क्योंकि व्यापार में लाभ-हानि का पता चला, तो अलग अलग प्रकार के लोगों से वास्ता होता है।
सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक की पीड़िताओं की पैरवी करने वाली अधिवक्ता फरहा फैज ने कहा कि ऐसी रवायत से डरने की जरूरत नहीं है, जो महिलाओं पर बंधन डालती है। संविधान ने नारी के सम्मान में कोई कसर नहीं छोड़ी है, लेकिन नारी को खुद भी जागरूक होने की जरूरत है। सामाजिक कार्यकर्ता रेखा कुमार ने कहा कि पुरुषों की मानसिकता में बदलाव होना जरूरी है। घर से ही इसकी शुरुआत होती है, परिवार में पुरुषों को पत्नी के कामकाज में सहयोग करना चाहिए, ताकि पत्नी को सम्मान का अहसास हो सके। इनके अलावा डाक्टर श्वेता विरमानी, डाक्टर क्षिप्रा तिवारी, एसोसिएट प्रोफेसर दीपा चौहान, डाक्टर अलका पोपली, काउंसलर सुरभि सिंह, गृहणी अंजना सैनी, सुमन चौहान और स्कूल संचालिका श्यामली गुप्ता और डाक्टर सीमा शर्मा ने कहा कि महिलाओं में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, बस प्रतिभा को पहचानने की जरूरत है। पारिवारिक जिम्मेदारी संभालने के साथ ही पति के साथ व्यापार में हाथ बंटाना चाहिए। महिलाओं के प्रति होने वाले अपराध को लेकर समाज में मानसिकता के बदलाव की बात कही गई। तो अपने परिवार में बेटों को ऐसे संस्कार देने की वकालत की गई, ताकि वह घर से बाहर निकलने पर दूसरे परिवार की बेटियों को बुरी नजर से ना देखें। ऐसा होने से सोच में परिवर्तन आएगा और समाज में नारी का सम्मान और बढ़ेगा। यह भी कहा गया कि जननी ऐसे घर का निर्माण करें, जिसमें प्यार की छत हो, विश्वास की दीवारें हों, सहयोग के दरवाजे हों, अनुशासन की खिड़कियां हों और समता की फुलवारी हो।
महिलाओं ने कहा
महिलाएं मल्टीटास्किंग होती हैं, जो हर कार्य को करने में रुचि रखती हैं। महिलाएं जागरूक हों अपने अधिकार और दायित्व पहचानें, तो सम्मान और बढ़ेगा। अपराजिता अभियान बेहद सराहनीय है। दीपा चौहान -- एसोसिएट प्रोफेसर
घर से निकलकर महिलाएं कारोबार क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। इससे सोच बदलती है, तो सम्मान भी बढ़ता है। अपराजिता अभियान ने यह मंच देकर प्रोत्साहित किया है। -- नीलम सिंघल -- गौतम ज्वेलर्स की संचालिका
हिचक दूर करनी चाहिए, खुद की पहचान बनाएं। जरूरी नहीं कि पति के नाम से ही जाना जाए, बल्कि ऐसा कार्य करें कि पति को उसकी पत्नी के नाम से सम्मान मिले। नारी सम्मान के प्रति पुरुषों की सोच में परिवर्तन जरूरी है। -- रेखा कुमार -- सामाजिक कार्यकर्ता
परिस्थिति से समझौता नहीं करना चाहिए, बल्कि सही गलत का आकलन करके खुद फैसला करना चाहिए। कानून ने महिलाओं को अधिकार दिए हैं, बस अपने अधिकारों को पहचानने की जरूरत है। -- फरहा फैज --- सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता
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पारिवारिक जिम्मेदारी संभालने के साथ ही महिलाओं को अपनी प्रतिभा के अनुरूप कार्य करना चाहिए। किसी रुढ़िवादी परंपरा में पड़ने की जरूरत नहीं, लेकिन संस्कारों का ह्रास भी नहीं होना चाहिए। -- सुरभि सिंह, काउंसलर
घर की जिम्मेदारी निभाना भी जरूरी है, लेकिन मन ही मन घुटना नहीं चाहिए। अपने अधिकारों को जानें और दायित्व का निर्वाह करें, सम्मान जरूर बढ़ेगा। -- सुमन चौहान, गृहणी
परिवर्तन प्रकृति का नियम है। महिलाओं को भी परिवर्तन के साथ अपने लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए। घर में बेटों को समझाएं कि नारी की अहमियत क्या है, तो शायद कोई मुश्किल सामने नहीं आएगी। इस जागरूकता के लिए अपराजिता अभियान प्रशंसनीय है। -- डाक्टर श्वेता विरमानी -- चिकित्सक, चर्मरोग विशेषज्ञ
गार्गी और सीता के जमाने को छोड़ना होगा, अब परिवेश बदल रहा है। नारी ने खुद का नजरिया बनाया है और तरक्की की तरफ बढ़ी है। अपराजिता अभियान सराहनीय कदम है, ऐसे आयोजन होने चाहिए। -- डाक्टर अलका पोपली -- क्लीनिकल साइक्लोजिस्ट
सुधार के लिए स्वयं से पहल होनी चाहिए। आप जैसा व्यवहार करेंगे, वैसा ही मिलेगा। अपने दायित्व समझें और अच्छे बुरे का खुद फैसला करें। अपराजिता अभियान सराहनीय है, इस अभियान से महिलाओं का मनोबल बढ़ेगा। -- अंजना सैनी , गृहणी
बदलते दौर में महिलाओं को भी बदलना चाहिए। समाज में क्या चल रहा है, क्या अच्छा है, क्या बुरा है, उसकी पहचान रहे। अपराजिता अभियान से जुड़ना सुखद रहा। -- श्यामली गुप्ता, स्कूल संचालिका
महिलाओं को जागरूक करने का अच्छा प्रयास है, इससे महिलाओं की हिचक दूर होगी और अपनी बात रखने का मौका मिलेगा। -- डाक्टर सीमा शर्मा, चिकित्सक
हर क्षेत्र में नारी अपनी शक्ति का प्रदर्शन करती आई है। जो अपनी प्रतिभा को नहीं पहचान पाती है, वह अपने अधिकारों से भी वंचित रह जाती हैं। अपराजिता अभियान एक बहुत अच्छी पहल है। -- डाक्टर क्षिप्रा धवन तिवारी, सर्जन