देवबंद (सहारनपुर)। मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक, 2017 में केंद्रीय कैबिनेट ने कुछ संशोधन की मंजूरी दी है। जिसके तहत तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) को गैर जमानती अपराध तो माना गया, लेकिन संशोधन के हिसाब से अब मजिस्ट्रेट को बेल देने का अधिकार होगा। इस मामले में देवबंदी उलमा का कहना है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ में शुरू से ही छेड़छाड़ की जा रही है। केंद्र का कानून बनाना और फिर बदलाव करना वर्ष 2019 के चुनाव में लाभ उठाना वाला है।
बृहस्पतिवार को फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मौलाना मुफ्ती अरशद फारुकी का कहना है कि भारतीय संविधान ने सभी को अपने धर्म के मुताबिक जिंदगी जीने का अधिकार दिया हुआ है। जिसमें किसी को भी हस्तक्षेप करने का हक नहीं है, लेकिन उसके बावजूद मुस्लिम पर्सनल लॉ से जान बूझकर छेड़छाड़ की जा रही है। जिसे किसी भी दशा में दुरुस्त नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि शुरुआती दिनों से ही सरकार ने जो तरीका इख्तियार किया हुआ है उसे ठीक नहीं कहा जा सकता। इसलिए उस पर नजरे सानी (पुनर्विचार) करने की जरूरत है। मुफ्ती अरशद फारुकी ने यह भी कहा कि सरकार इस तरह के मामले करके वर्ष 2019 के चुनाव में लाभ उठाने के प्रयास कर रही है। देवबंदी उलमा मौलाना सगीर कासमी का कहना है कि एक तो सरकार का धार्मिक मामलों में दखल देना गलत है। दूसरा यह है कि पहले तो सरकार कानून बनाती है और फिर उसमें बदलाव करती है। इससे साफ है कि यह पूरा षड्यंत्र चुनाव में राजनीतिक लाभ उठाने के लिए रचा गया है।