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हवन,यज्ञ कर क्रांतिवीरों को याद किया

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गंगोह (सहारनपुर)। उत्तर प्रदेश जनजागरण मंच के तत्वावधान में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के नाम से जानी जाने वाली 1857 की क्रांति के 161 वर्ष पूरे होने के क्रांति दिवस के अवसर पर वैदिक यज्ञ-हवन कर देशभक्त क्रांतिवीरों को याद किया गया।
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रामबाग रोड स्थित आर्य भवन पर आयोजित क्रांति दिवस कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष डा. वीरसिंह भावुक ने कहा कि स्वामी दयानंद सरस्वती मेरठ से शुरू हुए 1857 की क्रांति के मूल प्रणेता एवं सूत्रधार थे। क्रांति के प्रमुख सूत्रधारों का उनसे निकट का संपर्क था। स्वामी जी ने तीन वर्ष तक क्रांति युद्ध के दौरान अज्ञातवास में रहते हुए सैनिक गतिविधियों और क्रांति तैयारियों का सूत्र संचालन किया था। उन्होंने बताया कि क्रांति के असली नायक तो वह 85 सैनिक हैं, जिन्होंने स्वामी दयानंद की प्रेरणा पाकर चर्बी लगे कारतूस चलाने और मशक से पानी पीने के लिए अंग्रेज अफसरों को मना कर दिया था। इस सैनिक टुकड़ी में मुस्लिम, सैनी, गुर्जर, वैश्य, पंडित, जाट, सिक्ख, वाल्मीकि सहित सभी जाति और मजहब के सैनिक थे। इस क्रांति का मेरठ के एक आर्य समाज मंदिर से जन्म हुआ था। उन्होंने कहा कि यदि यह क्रांति दो दिन पहले ना होती तो इसके परिणाम कुछ और ही होते। जसवीर आर्य, मौलवी खालिद ने भी विचार रखे। सूफी तहसीन, खालिद अंसारी, राशिद अंसारी, संदीप तायल, सतकुमार वाल्मीकि, राजपाल कश्यप, सोमदत्त नामदेव, सुदेश प्रभा आदि रहे।
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