फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फर्जी बिल मामले में जेल गए पालिकाध्यक्ष को नहीं मिली बेल

विज्ञापन
विज्ञापन
देवबंद (सहारनपुर)। जलकल विभाग के फर्जी बिल मामले में जेल गए नगरपालिका चेयरमैन जियाउद्दीन अंसारी को बुधवार को जमानत नहीं मिल पाई। एडीजे प्रथम बबीता रानी की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। इस मामले में अदालत ने अपना निर्णय देने के लिए बृहस्पतिवार की तारीख दी है। विदित रहे कि जियाउद्दीन अंसारी सन् 2000 में नगरपालिका के चेयरमैन चुने गए थे। उस दौरान उनके कार्यकाल में जलकल विभाग में फर्जी बिलों के जरिए लाखों रुपये का घोटाला हुआ था। उन पर आरोप था कि जियाउद्दीन अंसारी ने जलकल विभाग के लिपिक से मिलकर इमरान पंप स्टोर लोहानी सराय को गलत भुगतान कर नगरपालिका को भारी नुकसान पहुंचाया है।
विज्ञापन

पालिका के सभासद विनय कुच्छल ने उन पर धोखाधड़ी व सरकारी धन का दुरुपयोग करने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया था। पुलिस ने विवेचना के बाद मामले की चार्जशीट कोर्ट में पेश की थी। सितंबर 2017 में अंसारी ने हाईकोर्ट में स्टे लेने के लिए प्रार्थना पत्र दिया था। हाईकोर्ट ने उन्हें स्थानीय कोर्ट में पेश होने के लिए 45 दिन का समय दिया था, लेकिन कई समन के बाद भी वह कोर्ट में पेश नहीं हुए तो मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने उनकी संपत्ति कुर्क करने के आदेश दिए। इस मामले में अंसारी ने 20 मार्च को सीजेएम कोर्ट सहारनपुर में पेश होकर जमानत के लिए प्रार्थना पत्र दिया। लेकिन अदालत द्वारा प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिए जाने के बाद उन्होंने जमानत के लिए एडीजे कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था। एडीजे प्रथम बबीता रानी की अदालत ने फैसला सुरक्षित रख बुधवार की तारीख लगाई थी। परंतु बुधवार को अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला पुन: सुरक्षित रख लिया। इस मामले में फैसला बृहस्पतिवार को आने की संभावना है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें