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हजरत शेख सादिक व मामू आलाबख्श की मजार पर चढ़ाई सरकारी चादर

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हजरत शेख सादिक व मामू आलाबख्श की मजार पर चढ़ाई सरकारी चादर
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गंगोह (सहारनपुर)। हजरत कुतबे आलम शेख अब्दुल कुद्दूस के 494वें उर्स की रस्मों की शुरुआत करते हुए शनिवार देर शाम और रविवार सुबह दरगाह शेख सादिक और मामू मोलाबख्श में जुलूस के साथ लाकर चादर शरीफ चढ़ाई गई। शाह अता मंजिल में महफिले सीरते औलिया अल्लाह, कुल शरीफ और कव्वाली का आयोजन किया गया।
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रविवार सुबह शाह अता मंजिल से सज्जादानशीं हकीम जफर कुदुसी और नायब सज्जादानशीं आसिम कुद्दुसी की अगुवाई में जुलूस चादर शरीफ निकाला गया। सैकड़ों जायरीन कव्वालियों पर झूमते गाते दरगाह हजरत शेख सादिक और मामू मोलाबख्श पर पहुंचे और मजार मुबारक पर चादर चढ़ाई। यहां पहुंचने पर दरगाह के सज्जादानशी इरशाद रब्बानी ने उनकी अगवानी की। बाद में नमाज असर शाह कुरैश के मकान पर फातिहा कुल शरीफ के बाद लंगर वितरित किया गया। सज्जादानशीं शाह मेहताब आलम, कलियर शरीफ के सज्जादा नशीं शाह मंसूर एजाज, अहसान साबरी कानपुरी, रूप शाह, इशरत, तारिक फारुकी, अजहर मियां कुद्दूसी, शाह बहजाद साबरी, आसिफ कुददूसी, राशिद वकील आदि शामिल रहे। शाह अता मंजिल पर सज्जादानशीं हकीम शाह जफर कुददूसी ने भगतों की दस्तारबंदी की। हजरत मामू मोलाबख्श एवं माता लाड़ो रानी सेवा समिति के गद्दीनशीं चंद्रपाल दुसानी, राजकुमार, जगदीश, रामलाल, जयकुमार सहित अनेकों स्थानों से आए गद्दी नशीनों द्वारा नगर में विभिन्न स्थानों पर गद्दियां लगाई गई हैं। सैकड़ों जायरीनों ने मजारों पर माथा टेककर मन्नतें मांगी। इससे पूर्व शनिवार देर शाम मामू मौलाबख्श दरगाह के सज्जादानशीन हाजी इरशाद रब्बानी की सरपरस्ती में मामू मौला बख्श और हजरत शेख सादिक की मजार पर सरकारी चादर चढ़ाई गई। कव्वालियों के साथ नाचते गाते बड़ी संख्या में हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, दिल्ली आदि प्रदेशों से आए मामू के मुरीद दरगाह पहुंचे और वहां चादर चढ़ाकर मन्नतें मांगी। लाडोरानी की मजार पर भी श्रृंगार का सामान और झाडू़ चढ़ाई गई। इसके बाद दस्तारबंद कव्वाल नासिर एंड पार्टी सहित कव्वालों ने ऐसा सूफीयानां समां बांधा कि मामू के दीवाने देर रात तक मस्ती में झूमते रहे। उधर, शाह अता मंजिल में कुल शरीफ और महफिलें कव्वाली का आयोजन हुआ। संचालन अनवर साबरी ने किया। रात भर चली महफिलें कव्वाली में दिल्ली से आए असलम बजमी साबरी और सहारनपुर के यामीन साबरी एवं तसलीम साबरी ने अपनी कव्वालियों से जायरीनों को मदमस्त किए रखा। इससे पूर्व हजरत कुतबे आलम दरगाह के सज्जादानशीं शाह महताब आलम कुददूसी ने विशेष दुआ कराई।
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