देवबंद (सहारनपुर)। हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में शुक्रवार को साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था जहान-ए-अदब और साहित्य संगम के संयुक्त तत्वावधान में महफिल-ए-मुशायरा आयोजित किया गया, जिसमें शायरों ने अपने कलामों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
बैरून कोटला स्थित उर्दू घर में मुशायरे की शमा रोशन दिलशाद खुश्तर ने की। शमीम किरतपुरी ने पढ़ा, ‘हिंदी से बोली यह उर्दू है बहन अब कैसी तू’। दिलशाद खुश्तर ने कहा, ‘मेरी मां को खुशी होती है खुश्तर, मैं जब लोगों से हिंदी बोलता हूं’। तनवीर अजमल ने पढ़ा, ‘यूं तो जमाने भर में जबाने हैं और भी, लेकिन हमारे देश में हिंदी की शान है’। रजी उस्मानी ने कहा, ‘कमी नहीं है कोई इसमें है जबां ऐसी, रजी ये हिंदी है निकली है हिंद से अपने’। महताब आजाद ने पढ़ा, ‘गंगा हिंदी यमुना उर्दू जैसी है, भारत फूल है दोनों खुशबू जैसी हैं’। डा. सुधीर कोरी ने कहा, ‘जो वक्त की आंधी से खबरदार नहीं, वो कुछ ओर ही होंगे कमलकार नहीं’। डा. सुहेल अकमल ने कहा, ‘गैर को भी बनाए जो अपना, हिंदी ऐसी जुबान है प्यारे’। नफीस खान ने पढ़ा, ‘हिंदी दिवस को आज मनाने के वास्ते, उर्दू जबां को चाहने वाले भी आ गए’। डा. दिवाकर गर्ग ने कहा, ‘हिंदी उर्दू दोनों बहने, भारत के हैं दोनों गहने’। इनके अलावा आजम साबरी, उस्मान खान, नदीम अहमद आदि ने भी कलाम प्रस्तुत किए। इस मौके पर मौ. इस्माइल, नजीर अहमद, मुस्तफा, इरफान अहमद, मुदस्सिर खान, उस्मान कुरैशी आदि मौजूद रहे।