जलाशयों का सूखना जीवन के लिए खतरे का संकेत
सहारनपुर। पर्यावरणविद् कमल कश्यप ने कहा कि प्राकृतिक जलाशयों का सूखना मनुष्य जाति ही नहीं, बल्कि सभी जीवों के लिए खतरे की घंटी है। वह शनिवार को नेचुरल एनवायरमेंटल अवेयरनेस सोसायटी की ओर से मुराली इंटर कॉलेज में आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
कश्यप ने कहा कि पिछले कुछ दशक से प्राकृतिक संसाधनों का दोहन बढ़ा है। मनुष्य अपनी जरूरतों के लिए प्रकृति को नुकसान पहुंचा रहा है। मगर हमें समझना होगा कि इसका खामियाजा हमें ही भुगतना होगा। उन्होंने पेयजल संकट से बचने के लिए जलाशयों को पुनर्जीवित करना होगा। नदियों और तालाबों को दूषित होने से बचाना होगा और पानी का इस्तेमाल सोच समझकर करना होगा। उन्होंने अधिक से अधिक पौधे लगाने की भी सीख दी। चेतावनी दी कि यदि हमने ऐसा नहीं किया तो हमारी आने वाली पीढ़ियों को इसके परिणाम भुगतने होंगे। कार्यशाला में प्रबंधक राजकुमार, शाहिस्ता, अनीता, ज्योति, अमृता, वीमल, मनोज, अमित, अजीत, जय कुमार, राजेश देवी, प्रियंका पंवार आदि मौजूद रहीं।