देवबंद (सहारनपुर)। प्रदेश की योगी सरकार द्वारा 4 हजार उर्दू टीचरों की भर्ती पर रोक लगाने पर देवबंदी उलमा ने कड़ा विरोध किया है। उलमा का कहना है कि भाजपा सरकार का शुरू से ही यह रवैया रहा है की मुसलमानों से कोई भी चीज जुड़ी होती है तो उसी पर वो पाबंदी लगाने की कोशिश करती है। आरोप लगाया कि बीजेपी मुसलमानों को माली तौर पर कमजोर करने का काम कर रही है।
मदरसा जामिया शेखुल हिंद के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती असद कासमी का कहना है कि भाजपा सरकार शुरू से ही मुस्लिम विरोधी एजेंडे पर काम कर रही है। चार हजार उर्दू शिक्षकों की भर्ती की जा रही थी योगी सरकार ने उसे निरस्त करके स्पष्ट कर दिया है कि भाजपा कभी मुसलमानों का भला नहीं कर सकती। जिसकी जितनी निंदा की जाए कम है। मुफ्ती असद ने कहा कि उर्दू सिर्फ मुसलमानों की नहीं बल्कि हिंदुस्तान की तहजीब है। मदरसा दारुल उलूम निस्वा के उस्ताद मौलाना असदुल्लाह का कहना है कि उर्दू और उर्दू वालों पर हमेशा ज्यादती हुई है। योगी सरकार ने एक झटके में चार हजार लोगों की उम्मीदों को खत्म कर दिया। जो बड़े अफसोस की बात है। उन्होंने कहा कि योगी सरकार ही नहीं इससे पहले दूसरी सरकारों ने भी मुसलमानों का उत्पीड़न किया और उन्हें बेरोजगार करने का काम किया है। ऑल इंडिया दावातुल मुस्लीमीन के संरक्षक कारी इस्हाक गोरा ने कहा कि बीजेपी सरकार लोगों को बेरोजगार करने में लगी हुई है। उर्दू शिक्षकों की भर्ती को निरस्त करना मुसलमानों से भेदभाव का सबूत है।