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बसों को शहर में जाने से रोका, यात्रियों को दूर तक चलना पड़ा पैदल

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बसों को शहर में जाने से रोका, यात्री भटकते रहे
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सहारनपुर। दलित संगठनों द्वारा शहर में लगाया गया जाम शहर ही नहीं यहां आने वाले लोगों के लिए भी मुसीबत बन गया। शहर के पूरी तरह से जाम होने के बाद सहारनपुर की ओर आने वाली बसों को बाहर ही रोक दिया गया। यात्रियों को कई-कई किलोमीटर तक पैदल ही सफर करना पड़ गया। कलक्ट्रेट, अस्पताल चौक, देहरादून चौक और घंटाघर पर जाम लग जाने से न सिर्फ शहर के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा बल्कि बाहर से आने और जाने वाले लोगों को भी काफी परेशानी हुई।
जाम की स्थिति को देखते हुए देहरादून की ओर से आने वाली बसों को जेल चुंगी पर ही रोक दिया गया। जेल चुंगी पर ही उतार दिए जाने से नाराज यात्रियों की चालक और परिचालक से नोकझोंक भी हुई। यात्री सिर पर सामान और बच्चों को गोद में लिए पैदल ही कई किलोमीटर तक पैदल चलकर पहुंचे। छुटमलपुर से अपनी बीमार मां जगवती को अस्पताल में उपचार के लिए ले जा रहे दिनेश ने बताया कि कोई रिक्शा तक नहीं मिला। बीमार मां को कुछ दूर तक तो पैदल लेकर चलना पड़ा। फिर एक मोटरसाइकिल चालक से हाथ जोड़े तो उसने अस्पताल तक उन्हें छोड़ा। देहरादून के दीपा और विनय अपने बच्चों का गोद में लिए बैग उठाए देहरादून चौक तक पैदल ही पहुंचे।
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दिल्ली की ओर से आने वाली बसों को विकास भवन के नजदीक रोक लिया गया। वहां से यात्री पैदल आए। बेहट की ओर से आने वाली बसों को नाजिरपुरा में ही रोक दिया गया जबकि मेरठ की ओर से आईं बसों को पेपर मिल से कुछ पहले ही रोक दिया गया। यात्री पैदल ही गंतव्य तक पहुंचे। जगह-जगह जाम और हिंसक घटनाओं को देखते हुए बसों का संचालन काफी देर तक रोक दिया गया। इससे यात्री परेशान हो गए। रोडवेज बस चालकों द्वारा हाथ खड़े कर दिए जाने के बाद यात्री रेलवे स्टेशन पहुंचे। इससे ट्रेनों में भारी भीड़ हो गई।
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उधर, परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक मनोज कुमार का कहना है कि जगह-जगह जाम के चलते बसें कई जगह फंस गईं। शहर में जाम की स्थिति के चलते कुछ बस चालकों ने कुछ देर के लिए बसें बाहर ही रोक दीं। हालांकि बाद में सभी बसों का निर्धारित स्थानों से ही संचालन कराया गया।
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