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पटरी से उतरी आयुर्वेदिक चिकित्सा

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छुटमलपुर (सहारनपुर)। जिले के आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सालय राम भरोसे चल रहे हैं। यहां 25 चिकित्सालयों में से 11 पर चिकित्सक ही तैनात नहीं है। यही स्थिति फार्मेसिस्टों की है। ऐसे में यहां की स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल है।
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प्रदेश के आयुष मंत्री डा. धर्म सिंह सैनी जिले की नकुड़ सीट से विधायक हैं। उनके जिले में ही आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा खुद लचर है। जिले में आयुर्वेद के 19 और यूनानी के छह अस्पताल स्थापित हैं। इनमें आयुर्वेद के पांच अस्पतालों और यूनानी के सभी छह अस्पतालों में चिकित्सक तैनात नहीं हैं। यूनानी चिकित्सा के संसारपुर, चिलकाना, बुड्ढाखेड़ा, अंबेहटा पीर, धौराला और कैलाशपुर अस्पतालों में चिकित्सा व्यवस्था फार्मेसिस्टों के भरोसे चल रही है। इसमें भी संसारपुर और कैलाशपुर में तो एक ही फार्मेसिस्ट को तीन-तीन दिन के लिए तैनात किया गया है। ऐसे में बाकी के दिन दोनों अस्पतालों में ताला लगने की स्थिति है। यहां केवल चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ही रोगियों की समस्या का निदान करने के लिए उपलब्ध रहते हैं। बताया जाता है कि पिछले दिनों यूनानी के कुछ चिकित्सकों को दूसरे जिलों से स्थानांतरित करके यहां भेजा गया था, लेकिन उन्होंने यहां चार्ज नहीं लिया और अपना स्थानांतरण रुकवाने में सफल रहे।
ऐसे में सरकार की आयुर्वेदिक और यूनानी दवाओं से चिकित्सा उपलब्ध कराने की योजना को पलीता लग रहा है। उधर, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डा रामकृपाल सिंह के अनुसार सेवानिवृत्ति के चलते और नए चिकित्सक नहीं मिलने के कारण स्थिति खराब हुई है। अगले माह ट्रांसफर सीजन में चिकित्सकों की तैनाती होने की उम्मीद है। जिले में चिकित्सक उपलब्ध होते ही उन्हें अस्पतालों में तैनाती दे दी जाएगी।
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