भीम आर्मी की सियासी दूरी से राजनीतिक दलों में उहापोह
सहारनपुर। विधानसभा चुनाव के ठीक बाद सहारनपुर हिंसा में सुर्खियों में आई भीम आर्मी के जरिए दलित मतों को रिझाने की हर राजनीतिक दल ने कोशिश शुरू कर दी थी। मगर, निकाय चुनाव में भीम आर्मी के संस्थापक की फोटो पर कांग्रेस प्रत्याशी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर संगठन ने अपने मंसूबे साफ कर दिए हैं। भीम आर्मी के इस रुख के बाद कांग्रेस सहित अन्य राजनीतिक दल असमंजस में हैं। अब टिकट विवाद सहित कई मामलों के जरिए सियासी लोग अपनी झेंप मिटाना चाह रहे हैं, मगर भीम आर्मी की सियासी दूरी ने ना केवल संगठन को मजबूती दी है, बल्कि राजनीतिक दलों को भी झटका लगा है।
शब्बीरपुर हिंसा के बाद चर्चा में आई भीम आर्मी की मजबूत पैठ ने राजनीतिक दलों को परेशान कर दिया था। आलम यह रहा कि दलितों को भीम आर्मी के जरिए बिखरने नहीं देने के लिए बसपा सुप्रीमो सड़क मार्ग से सहारनपुर पहुंची और एकजुटता का मंत्र दे गई। कांग्रेस दलित मतों की सेंधमारी की जुगत से भीम आर्मी के समर्थन में आई और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी तक को सहारनपुर लाया गया। इसके बाद भीम आर्मी के जरिए कांग्रेस दलित मतों को साधने में जुटी रही। यही कारण है कि कांग्रेस प्रत्याशी ने अपने प्रचार सामग्रियों तक पर भीम आर्मी और उसके संस्थापक के फोटो के प्रयोग से गुरेज नहीं किया। यहां बता दें कि सहारनपुर जिले भर में दलित मतदाताओं की भूमिका बेहद निर्णायक है। इतना नहीं नहीं, हर राजनीतिक दल अपने परंपरागत मतों के साथ दलित मतों को जोड़ने की फिराक में है। फिलहाल भीम आर्मी के इस स्टैंड से निकाय चुनाव में राजनीतिक दलों के लिए संकट की स्थिति है। उधर, राजनीतिक दल अब भीम आर्मी पर टिकट नहीं मिलने से उठाया गया कदम करार देने में जुटे हैं। फिलहाल मतदान से पहले राजनीतिक दलों से संगठन की दूरी के सब अपने मायने निकाल रहे हैं।