सहारनपुर। स्कूल से दी गई आयरन की गोली खाने के बाद आठवीं कक्षा के छात्र की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि स्कूल छात्र को अधिक गोलियां दी गई थीं, जबकि हेडमास्टर ने कहा सभी छात्रों को एक-एक गोली ही दी गई थी। सीएमओ भी बच्चे की मौत की कुछ और वजह मान रहे हैं। फिर भी उन्होंने मामले की जांच कराने की बात कही है। उधर, बच्चे कीम मौत के बाद पीड़ित परिवार में कोहराम मचा हुआ है।
देहात कोतवाली क्षेत्र के गांव धतौली रांघड़ निवासी अमित मलिक ने बताया कि उनका भतीजा 12 वर्षीय मोहित पुत्र जसवंत गांव के ही जूनियर हाई स्कूल में आठवीं में पढ़ता था। तीन अक्तूबर को चिकित्सा विभाग की ओर से भेजी गई गोलियां शिक्षकों द्वारा बच्चों को दी गई। आरोप है कि मोहित ने स्कूल में ही ज्यादा गोलियां खा लीं। जिससे कुछ ही देर बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। स्कूल से घर आने पर वह बेहोश होकर गिर पड़ा। परिजन उसे उठाकर तुरंत जिला अस्पताल ले गए, जहां मोहित की हालत को गंभीर मानते हुए चिकित्सकों ने रेफर कर दिया। परिजन मोहित को लेकर चंडीगढ़ पहुंचे, जहां छह अक्तूबर को मोहित ने दम तोड़ दिया। सात अक्तूबर को परिजन मोहित के शव को लेकर लौटे। मोहित के परिजनों ने मामले की जांच कराकर दोषियों के विरुद्घ कार्रवाई करने की मांग की है।
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मोहित ने साथी बच्चों के हिस्से की भी गोलियां खाईं : शिक्षक
स्कूल के हेडमास्टर रमेश ने बताया कि उन्होंने सभी बच्चों को एक-एक गोली दी थी। बच्चों को गोलियां स्कूल में ही खाने को कहा गया था, मगर कई बच्चे गोलियां लेकर घर चले गए। रमेश का कहना है कि स्कूल से घर लौटते वक्त मोहित ने अपने साथियों से गोलियां लेकर खा ली। रमेश का कहना है कि मोहित की तबीयत शाम छह बजे बिगड़ी थी, जबकि स्कूल की छुट्टी दोपहर में हो जाती है। ऐसे में मोहित की मौत की कोई और वजह भी हो सकती है।
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पुलिस ने मामले की जांच शुरू की
देहात कोतवाली प्रभारी पवन चौधरी ने बताया कि बच्चे की मौत की सूचना उनको परिजनों के द्वारा दी गई थी। पुलिस मौके पर पहुंची थी। परिजनों का आरोप है कि बच्चे को अधिक गोलियां दी गईं, जिसकी वजह से उसकी मौत हुई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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आयरन की गोलियों से नहीं होती मौत: सीएमओ
सीएमओ डॉ. बीएस सोढ़ी ने घटना की जानकारी होने से इनकार किया। उन्होंने बताया कि आयरन की अधिक गोली खाने से मौत नहीं हो सकती। हो सकता है कि बच्चे की मौत का कारण कुछ और हो। उन्होंने मामले की जांच कराने की बात कही। साथ ही कहा कि गोलियां स्कूल में ही खिलाने का नियम है। ऐसे में बच्चे स्कूल से गोलियां अपने घर कैसे ले गए यह भी गंभीर मामला है।