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शिक्षक भर्ती में प्राथमिकता देने की मांग को लेकर प्रदर्शन

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शिक्षक भर्ती में प्राथमिकता देने की मांग को लेकर प्रदर्शन
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सहारनपुर। परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती में प्राथमिकता दिए जाने की मांग को लेकर दो वर्षीय डिप्लोमाधारी अभ्यर्थियों ने सोमवार को डीएम कार्यालय पर प्रदर्शन किया। प्रधानमंत्री को चिट्ठी भेजकर डिप्लोमाधारी अभ्यर्थियों के हक में फैसला लेने की मांग दोहराई गई।
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संयुक्त प्रशिक्षु मोर्चा बीटीसी 2015 के बैनर तले सोमवार को कलक्ट्रेट पहुंचे आयुष सैनी और शुभम गुप्ता ने बताया कि एनसीटीई (राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद) ने कक्षा एक से पांच तक की कक्षाओं को पढ़ाने वाले प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती के लिए न्यूनतम दो वर्षीय डिप्लोमाधारी अभ्यर्थियों को योग्य माना था। जबकि कक्षा छह से आठ तक के लिए बीएड की अनिवार्यता की गई थी। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने यूपी सरकार को छूट दी थी कि वह बीएड अभ्यर्थियों को छह माह का प्रशिक्षण देकर कक्षा एक से पांचवीं तक के बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में शामिल कर सकती है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में दो लाख से अधिक अभ्यर्थी दो वर्षीय डिप्लोमाधारी हैं, जो बेरोजगार घूम रहे हैं। वर्ष 2019 तक यह संख्या पांच लाख तक पहुंच जाएगी। 28 जून 2018 को एनसीटीई ने प्राथमिक शिक्षा के लिए दो वर्षीय डिप्लोमाधारियों के साथ ही बीएड अभ्यर्थियों को भी योग्य माना है। यानी वह भी प्राथमिक शिक्षा के लिए आवेदन कर सकेंगे। चूंकि शिक्षकों के पद सीमित हैं। ऐसे में बीएड अभ्यर्थियों को शामिल करने से निश्चित रूप से कंपीटीशन बढ़ेगा, जिसमें अनेक डिप्लोमाधारी अभ्यर्थी शिक्षक नहीं बन सकेंगे। सोमवार को कलक्ट्रेट पहुंचे अभ्यर्थियों ने प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती में दो वर्षीय डिप्लोमाधारियों को प्राथमिकता देने की मांग की है, जिनमें बीटीसी और डीएलएड के अभ्यर्थी शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों में प्रशांत राणा, सचिन चौधरी, बबीता समेत अभ्यर्थी शामिल रहे।
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