आतंक और आतंकियों का कोई मजहब नहीं होता : उलमा
देवबंद। आतंकवाद पर बरेलवी मसलक से आए फतवे पर देवबंदी उलमा का कहना है कि आतंक और आतंकवादियों का कोई मजहब नहीं होता। विश्वविख्यात इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम आतंकवाद के विरोध में कई बार फतवा जारी कर चुका है।
फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मौलाना मुफ्ती अरशद फारुकी का कहना है कि दहशतगर्दी किसी भी मजहब का इंसान फैलाए ये जुर्म है। इसी तरह मुल्क के प्रति गद्दारी करने वाला भी बड़ा मुजरिम होता है। दारुल उलूम समेत दूसरे दीनी इदारे आतंकवाद को गलत बताते हुए कई बार फतवे जारी कर चुके हैं। मुफ्ती अरशद फारुकी ने कहा कि आतंकवाद दुनिया में कहीं भी हो रहा है वो निंदनीय है। ऑल इंडिया उलमा कौंसिल के महासचिव मौलाना तसव्वुर हुसैन का कहना है कि आतंकवाद के लिए इस्लाम ही नहीं बल्कि किसी भी मजहब में कोई गुंजाइश नहीं है। इस्लाम ने हमेशा से दूसरों की मद्द करने का संदेश दिया है। कहा कि सोची समझी साजिश के तहत मुसलमान और मदरसों का नाम आतंकवाद से जोड़कर उन्हें बदनाम किया जा रहा है। जबकि सच्चाई यह है कि मुसलमानों ने हमेशा दहशतगर्दी का पुरजोर विरोध किया है और आगे भी करते रहेंगे।