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सड़कों के हिसाब से उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा वर्ष 2017

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सहारनपुर। सड़कों के हिसाब से साल 2017 सहारनपुर के लिए खरा नहीं उतरा है। सड़कों के लिए घोषणाएं तो बहुुत हुईं, लेकिन वर्ष के अंतिम तक काम शुरू नहीं हो सका। कई बार अभियान चलाने के बाद भी सड़कें गड्ढा मुक्त नहीं हो सकीं। जिले के लोगों को उम्मीद है कि नए वर्ष 2018 सहारनपुर सड़कें पहले से बेहतर होंगी।
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विधानसभा चुनाव के बाद मार्च महीने में प्रदेश में भाजपा की योगी आदित्यनाथ सरकार बन गई। सरकार ने पूरे प्रदेश की सड़कों को अगस्त तक गड्ढा मुक्त बनाने के लिए अभियान चलवाया। सहारनपुर में लोक निर्माण विभाग और नगर निगम ने सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के लिए ताकत झोंक दी। मगर, इसके कुछ दिन बाद ही सड़कों में फिर से गड्ढे बन गए। अगस्त माह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सहारनपुर का दौरा किया। सीएम के आगमन से पूर्व एक बार फिर सड़कों को गड्ढा मुक्त बनाने के लिए अभियान चलाया गया, जिसमें करोड़ों रुपये खर्च हुए। मगर कुछ दिन बाद ही सड़कों की स्थिति पहले जैसी हो गई।
उधर, पूरे वर्ष दिल्ली-यमुनोत्री फोरलेन का निर्माण कार्य रुका रहा। एक माह पूर्व सहारनपुर-दिल्ली हाइवे स्टेट हाइवे से नेशनल हाइवे 709 का दर्जा मिल गया, लेकिन मार्ग को बेहतर बनाने के लिए काम शुरू नहीं हो सका। सहारनपुर-मुजफ्फरनगर फोरलेन मार्ग काम भी काफी समय से बंद पड़ा है। छुटमलपुर से सरसावा तक बनने वाले बाइपास मार्ग के लिए भूमि अधिग्रहण नहीं हो पाया। इसके चलते काम बंद पड़ा है।
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वहीं, देहात क्षेत्रों की सड़कें भी खस्ताहाल हैं, जिससे ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। टूटी सड़कों के कारण आए दिन दुर्घटनाएं भी होती रहती हैं। जनपदवासी आए दिन सड़कों को बेहतर कराने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों को प्रार्थना पत्र देते रहे, लेकिन लोगों की समस्याओं के पत्र कूड़े की टोकरी में डाल दिए गए। कहीं भी काम शुरू नहीं कराया गया। शहर की सड़कों हाल भी बुुरा रहा। निकाय चुनाव में रैली करने सहारनपुर आए सीएम योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने जनपद की सड़कों को बेहतर बनाए जाने की घोषणा की, लेकिन किसी भी सड़क पर 28 दिसंबर तक काम शुरू नहीं हो सका। सरकारी तंत्र ने अपनी नाकामी छुपाने के लिए सड़कों पर पैचिंग कार्य जरूर कराए। उधर, अधिकारियों का कहना है कि खनन बंद होने की वजह से निर्माण कार्य नहीं हो रहे हैं। पूरे साल सड़कों के हिसाब से 2017 सहारनपुर के लिए बेहतर नहीं रहा।
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शहर की सरकार से बहुत उम्मीदें
सहारनपुर। नगर पालिका परिषद को 2008 में नगर निगम का दर्जा मिल गया, लेकिन नौ वर्षों तक नगर निगम का चुनाव होने की वजह से नगर निगम की कमान प्रशासनिक अधिकारियों के हाथों में रही। इसका नतीजा यह हुआ कि शहर के विकास की रफ्तार में पिछड़ गया। शहर के तमाम इलाकों की सड़कों की हालत खराब होती चली गई। प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद सहारनपुर नगर निगम के चुनाव की तस्वीर साफ हुई, जिसके लिए 29 नवंबर को चुनाव हुआ और एक दिसंबर को मतगणना के बाद सहारनपुर को पहला मेयर मिल गया। भाजपा प्रत्याशी संजीव वालिया जीत दर्ज की और शहर की सरकार गठन हुआ। केंद्र और प्रदेश में सत्ता पर काबिज होने और भाजपा का ही मेयर बनने से लोगों को उम्मीद है कि अब सड़कें बेहतर होंगी।
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