सहारनपुर। पुराने शहर के महत्वपूर्ण पुल जर्जर हालत में पहुंच गए हैं। इनमें खुमरान पुल की हालत सबसे ज्यादा खराब है। इन पुलों से रोजाना भारी संख्या में वाहनों का आवागमन होता है। ऐसे में कभी भी दुर्घटना हो सकती है। पीडब्लूडी और नगर निगम पुलों की दुर्दशा की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
पुराने शहर में पांवधोई नदी पर करीब छह दशक पूर्व खुमरान पुल का निर्माण हुआ था। वर्तमान में पुल की हालत जर्जर है। पुल के दोनों तरफ की रेलिंग टूट चुकी और एक तरफ बने गहरे गड्ढे से हर समय हादसा होने का खतरा बना रहता है। इसी तरह दालमंडी व सब्जी मंडी पुल की मियाद भी कमजोर हो चुकी है। इन दोनों पुलों की रेलिंग व दीवारें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं। क्षेत्र के लोग कई बार नगर निगम के अधिकारियों से पुल की मरम्मत कराने की मांग कर चुके हैं, लेकिन नगर निगम ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। पांवधोई नदी के दोनों तरफ बनी पटरियों पर आने जाने के लिए इन्हीं पुलों का इस्तेमाल होता है। इनके अलावा देहरादून रोड पर सतयुग आश्रम मॉडल इंटर कॉलेज के बराबर में ढमोला नदी पुल की स्थिति भी बेहद खराब है। इस पुल से जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड का ट्रैफिक गुजरता है। छोटे-बड़े सभी वाहन यहां से होकर निकलते हैं। पुल की एक तरफ की फुटपाथ पूरी तरह गायब हो चुकी है और कई जगह पर रेलिंग भी टूटी पड़ी है। इस पुल का निर्माण 1976 में किया गया था। इसके बराबर में पुराना पुल है, जो नए पुल की अपेक्षा आज भी मजबूत स्थिति में है। पीडब्लूडी ढमोला नदी के पुल की दुर्दशा की सुध नहीं ले रहा है। नगर निगम के चीफ इंजीनियर पीके मित्तल का कहना है कि पुलों पर मरम्मत कार्य जल्द कराया जाएगा। इसे लेकर बृहस्पतिवार को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में पीडब्लूडी और नगर निगम के अधिकारियों की बैठक होगी।
अहम है ढमोला नदी पुल
सहारनपुर। ढमोला नदी पुल बेहद अहम है। चार राज्यों का ट्रैफिक इस पुल से होकर गुजरता है। जानकार बताते हैं कि 1965 और 1971 में भारत-पाकिस्तान के युद्घ के दौरान मेरठ से सेना इसी पुल के रास्ते से बार्डर पर गई थी। इसके अलावा ढमोला नदी पुल से भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी और कई बार राष्ट्रपति के काफिले भी निकल चुके हैं। अहम होने के बाजवूद भी लोक निर्माण विभाग पुल के रख-रखाव की ओर ध्यान नहीं दे रहा है। इस पुल से रोजाना सैकड़ों स्कूली बच्चे पैदल निकलते हैं। फुटपाथ न होने की वजह से सड़क से ही बच्चों को जाना पड़ता है। भारी वाहनों के आवागमन के कारण दुर्घटना होने का खतरा बना रहता है।