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किसान निराश

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साढ़ौली कदीम। पिछले चार वर्षों से बंद पडी क्षेत्र की एक मात्र आद्यौगिक इकाई वर्तमान पेराई सत्र में भी चलने का नाम नहीं ले पा रही है। मिल प्रबंधन के 15 फरवरी से लगातार कई तिथि तय करने के बावजूद भी पेराई सत्र को चालू नहीं कराया जा सका है। इससे क्षेत्र के गन्ना किसानों की चिंता बढ़ने लगी है।
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क्षेत्र के गांव टोडरपुर में स्थापित शाकंभरी शुगर मिल को चार वर्ष पूर्व मिल प्रबंधन ने बीमार घोषित कर बंद कर दिया था। इससे गन्ना किसानों के सामने समस्या खड़ी हो गई थी। मिल बंदी से क्षेत्र के किसान एवं मिल इकाई में काम करने वाले कर्मचारियों के परिवारों के सामने रोजी रोटी का संकट मंडराने लगा था। मिल चलवाने के लिए लंबे आंदोलन के बाद आखिरकार दिसंबर के अंतिम सप्ताह में मिल के नये प्रबंधन द्वारा मिल क्रय करने की जानकारी देते हुए फरवरी के प्रथम सप्ताह में पेराई सत्र चालू करने का दावा किया गया। इससे किसानों को उम्मीद की किरण दिखाई पड़ी थी कि मिल चलने से उनके गन्ने के पौधे की फसल तो अपने मिल में ही सप्लाई हो जाएगी। मिल प्रबंधन ने मिल गेट व गांवों में 15 फरवरी को मिल चालू किये जाने के पंपलेट भी लगवाए, लेकिन नियत तिथि से लगभग 41 दिन अधिक बीतने के बावजूद भी मिल प्रबंधन मिल चालू कराये जाने की कोई निश्चित तिथि तय नहीं कर पा रहा है।
इससे गन्ना किसान असमंजस में है कि वे आगे गन्ने की फसल की बुआई किस उम्मीद पर करे। क्योंकि नया मिल प्रबंधन लगातार उन्हें गुमराह कर रहा है। किसान रामपाल सिंह, पवन कुमार, दर्शनलाल काम्बोज, पद्मप्रकाश शर्मा, बाबूराम सैनी, बिरमपाल सिंह, इंद्राज सिंह, रकम सिंह, शोभाराम भगत, हाजी मुकरर्म, खुर्शीद, आमिर चौहान, गन्ना समिति के पूर्व चेयरमैन चौ. ताहिर आदि का कहना है कि यदि मिल को जल्द ही चालू नहीं कराया गया तो वे आंदोलन को बाध्य होंगे।
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मिल की मरम्मत का कार्य समय से संतोषजनक तरीके से पूर्ण हो चुका है। अभी मिल के पेराई सत्र को चालू कराये जाने की कोई तिथि तय नहीं हो पाई है। -आरएस ग्रेवाल गन्ना प्रबंधक टोडरपुर एग्रो।
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