सहारनपुर। राष्ट्रीय भाषा विकास परिषद उर्दू नई दिल्ली के तत्वावधान में जागरूक महिला संस्था परचम की ओर से महिलाओं द्वारा उर्दू में लिखी गई आत्मकथाओं को लेकर राष्ट्रीय सेमिनार कराया गया। सेमिनार में देशभर की अनेक शिक्षण संस्थाओं से आए वक्ताओं ने अपनी बात रखी। विशिष्ट अतिथि रहीं दिल्ली से आई शमा अफरोज जैदी ने कहा कि देश और भाषा अलग-अलग होने के बावजूद महिलाओं के जज्बात एक जैसे रहते हैं।
ब्राउनवुड पब्लिक स्कूल के सभागार में आयोजित सेमिनार के मुख्य अतिथि शोभित विश्वविद्यालय गंगोह से आए जहीर अख्तर रहे। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में महिलाओं द्वारा उर्दू में आत्मकथाएं लिखी गई हैं। उन्होंने सुआलेहा आबिद हुसैन, असमत चुगतई, अदा जाफरी, किश्वर नाहिद, कुरतुलेन हैदर, हमीदा बेगम, अमृता प्रीतम आदि का उदाहरण रखा। हरियाणा उर्दू अकादमी से आए डॉ. मुस्तरि ने बेगम अनीस की गुबारे कारवां पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। मीडिया पोस्ट नई दिल्ली से आए डॉ. शेख नगीनवी ने कुरतुलेन हैदर की आत्मकथा कारे जहां दराज है पर अपना शोध पत्र पढ़ा। देवबंद राजकीय महाविद्यालय से आए डॉ. आलिफ नाजिम ने अस्मत चुगतई के बारे में अपने विचार रखे। प्रयागराज से आई डॉ. सालेहा सिद्दीकी ने महिला कलमकारों की कहानी उन्हीं की जुबानी पर व्याख्यान दिया। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से आए डॉ. फुरकान संभली ने प्रोफेसर सुरैया हुसैन की आबरूए गंगा आत्मकथा पर अपनी बात रखी। गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय नोएडा से आए खान मोहम्मद आसिफ ने महिलाओं द्वारा अपनी आत्मकथा लिखे जाने को बेहद जरूरी बताया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. कुदसिया अंजुम और शाहिद जुबैरी ने संयुक्त रूप से किया। इस मौके पर सफिया सुबुही, डॉ. अनीस, डॉ. अयूब, मतलूब कुरैशी, रौनक, खुशबू खान, सुमाएला, फरजाना शेख, तंजीम मुईन, नेहा, रफत फरजाना, अजय कुंदन, मुश्ताक, अनवर अली, जलाल उमर, आसिफ शम्सी, तलत सरोहा, शाहजेब खान आदि मौजूद रहे।