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हाजिरी को लेकर असमंजस में शिक्षा मित्र

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हाजिरी को लेकर असमंजस में शिक्षा मित्र
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सहारनपुर। कोर्ट ने शिक्षामित्रों के शिक्षक पदों पर समायोजन को रद कर दिया है। प्रदेश भर में आंदोलन और आत्महत्याओं को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आंदोलनरत शिक्षा मित्रों को स्कूलों में लौटकर शिक्षण कार्य करने को कहा है। इसके बाद जनपद में भी तमाम शिक्षा मित्र स्कूलों में लौट गए हैं। मगर अब असमंजस की स्थिति यह बन रही है कि वह अपनी उपस्थिति शिक्षा मित्र के तौर पर उपस्थिति दर्ज करें या शिक्षक के तौर पर। कुछ स्कूलों में हाजिरी को लेकर उनका प्रधानाध्यापकों से टकराव तक हो रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद प्रदेश भर के शिक्षा मित्र सड़कों पर आ गए थे। जनपद में भी करीब 1800 शिक्षा मित्रों ने सप्ताहभर आंदोलन किया। मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद वह स्कूलों में तो लौट गए हैं। मगर अब उपस्थिति दर्ज करने को लेकर टकराव की स्थिति है। कई शिक्षा मित्र आंदोलन के दौरान बिना अवकाश के छुट्टी लेने के दिनों की उपस्थिति दर्ज करना चाहते हैं, जिनको संबंधित स्कूलों के प्रधान अध्यापकों द्वारा रोका जा रहा है। इसकी वजह से टकराव की स्थिति बन रही है। मुजफ्फराबाद ब्लॉक के कई स्कूलों में शिक्षकों और शिक्षा मित्रों के बीच नोकझोंक की बात भी सामने आ चुकी है। चूंकि शासन या विभाग की ओर से कोई लिखित और साफ आदेश नहीं है। ऐसे में प्रधान अध्यापक भी तय नहीं कर पा रहे हैं कि वह क्या करें?
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शिक्षण कार्य बाधित
कोर्ट के निर्णय के बाद से तमाम शिक्षामित्र सदमे में हैं। चूंकि अभी शिक्षामित्रों का भविष्य अधर में है। ऐसे में स्कूलों में लौट जाने के बावजूद ज्यादातर शिक्षा मित्र शिक्षण कार्य में रुचि नहीं ले रहे हैं। इसकी वजह से शिक्षण कार्य बाधित हो रहा है।

आदर्श समायोजित शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन की जिलाध्यक्ष अंजू कश्यप ने टकराव की स्थिति को स्वीकार किया है। बताया कि अनेक स्कूलों में प्रधानाध्यापक उन्हें शिक्षा मित्र मानकर शिक्षा मित्र के रजिस्टर में ही उपस्थिति दर्ज करने को कह रहे हैं। साथ ही उन्हें शिक्षा मित्र कहकर ताने मार रहे हैं। इसे लेकर शिक्षा मित्र आहत हैं और टकराव की स्थिति बन रही है।
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शिक्षा मित्रों को लेकर शासन से अभी कोई लिखित आदेश नहीं मिला है। मगर चूंकि मुख्यमंत्री ने उन्हें काम पर लौटने को कहा है। ऐसे में तमाम शिक्षा मित्र अपने विद्यालयों में जाकर पहले की तरह शिक्षण कार्य करें। जिस अंतराल में वह अवकाश पर रहे। उन दिनों का अवकाश ही दर्ज किया जाएगा और जब से स्कूलों में ज्वाइन किया है तब से उपस्थिति मानी जाएगी। शासन के आदेश के बाद ही तय होगा कि वह शिक्षा मित्र के तौर पर काम करेंगे या समायोजित शिक्षक के तौर पर।
--रामेंद्र सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।
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