क्षेत्र में बुखार से 12 लोगों की हुई मौत के बाद हरकत में आए स्वास्थ्य विभाग ने अब तक करीब 850 मरीजों के खून की स्लाइड तैयार की। इनमें से 50 प्रतिशत की जांच कर ली गई, जिनमें वायरल और टायफाइड के सर्वाधिक मामले सामने आए हैं। डेंगू के भी 17 केस पॉजिटिव मिले हैं।
स्वास्थ्य विभाग की लगभग 36 टीमें भले ही विगत कई दिनों से घर-घर जाकर लोगों को बीमारियों से बचाव को जागरूक करने में जुटी हैं, लेकिन डेंगू का डंक उन्हें भयभीत किए हुए है। क्योंकि, बुखार 12 लोगों की जिदंगी निकल चुका है। अभी भी अस्पतालों में बुखार पीड़ितों की भरमार है।
आलम यह है कि हर घर में कम से कम एक-दो सदस्य बुखार से पीड़ित है। डीएम के आदेश पर जिला मलेरिया अधिकारी डा. शिवांका गौड़ अपनी टीम के साथ पिछले कई दिनों से देवबंद में ही डेरा डाले हुए है। शिवांका गौड ने बताया कि बुखार पीड़ित करीब 850 लोगों की स्लाइड बनाई गई है।
इनमें से करीब 50 फीसदी के रक्त के नमूनों की जांच कर पूरी कर ली गई। अधिकांश में वायरल व टायफाइड के मामले ज्यादा मिले हैं। डेंगू के भी 28 संभावित मरीजों के सैंपल की जांच रिपोर्ट में 17 में डेंगू की पुष्टि हुई है। डा. शिवांका गौड़ ने बताया कि जागरूकता के अभाव में घरों की छतों पर रखे मिट्टी के बर्तनों में बारिश का पानी जमा मिला।
इसी पानी में डेंगू का लार्वा मिल रहा है। कूलर का पानी भी 3-4 दिन के बाद जरूर बदल दिया जाए। उन्होंने बताया कि जागरूकता अभियान में बुधवार से नगरपालिका के कर्मचारियों का भी सहयोग लिया जाएगा। स्वास्थ्य टीमों के साथ नगरपालिका कर्मी घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करेंगे।
टीमों को घरों में मिल रही ज्यादा गंदगी
घरों में गंदगी बहुत ज्यादा मिल रही है। इसलिए लोग अपने घरों में साफ-सफाई के साथ बर्तनों में पानी इकट्ठा न होने दें, क्योंकि पानी में डेंगू का लार्वा पनप रहा है। इसलिए बीमारियों से बचने के लिए लोगों को जागरूक होने की जरूरत है।
- डा. शिवांका गौड़, जिला मलेरिया अधिकारी
अधिकांश लैब संचालकों को जांचों की फुल फार्म मालूम नहीं
लैब संचालक बिना एमबीबीएस डाक्टर के परामर्श के ही स्वयं जांच रिपोर्ट बनाकर अपने हस्ताक्षर कर मरीज को थमा रहे है जो कानूनन गलत है। बिना एमबीबीएस डाक्टर के हस्ताक्षर वाली रिपोर्ट नहीं दी जानी चाहिए। विगत दिन लैब संचालकों से मीटिंग कर उन्हें इस संबंध में दिशा निर्देश भी दिए गए थे। अधिकांश लैब संचालक को तो जांचों की फुलफॉर्म भी मालूम नहीं है, जो कि चिंताजनक है।
- डा. मौ. सईद, मुख्य चिकित्साधिकारी