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सहारनपुर की सड़कों पर घट रही बसों की उम्र

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सहारनपुर। जिले की सड़कों की हालत ने वाहनों की उम्र को ही कम कर दिया है। छोटे वाहन ही नहीं जिले की सड़कों पर चलकर बसों की उम्र भी घट गई है। निर्धारित समय से पहले ही बसें खटारा हो रहीं हैं। ईंधन की खपत तो बढ़ ही रही है, रखरखाव का खर्च भी अन्य की अपेक्षा अधिक हो रहा है।
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सहारनपुर की सड़कों की हालत तो पहले से ही खराब है, बारिश ने सड़कों की पूरी तरह से उधेड़ डाला हैं। सड़कों पर चलने वाले वाहनों की हालत भी खराब हो गई हैं। सिर्फ छोटे वाहन ही नहीं बसों तक पर सड़कों की हालत का असर पड़ा है। सिर्फ रोडवेज बसों के आंकड़ों पर गौर करें तो खराब सड़कों पर चलने वाली बसों की उम्र घट गई है। ईंधन का खर्च औसतन दस प्रतिशत तक बढ़ रहा है और रखरखाव भी काफी अधिक हो गया है। सहारनपुर से दिल्ली वाया शामली रूट पर चलने वाली बसों की उम्र लगभग एक लाख किलोमीटर तक घट गई है। बताया जा रहा है कि जिस बस को 8 से नौ लाख किलोमीटर तक बसों को अच्छी हालत में चलाया जा रहा था, इस रूट पर बसें सिर्फ सात से आठ लाख किलोमीटर ही चल पा रहीं हैं। उसके बाद इन बसों की स्थिति लंबे रूट पर चलने लायक नहीं रह पा रही है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक अनुबंधित एवं नियमित बसों को मिलाकर इस रूट पर जिले भर के डिपो से लगभग 70 बसें संचालित की जा रहीं हैं। सिर्फ यही रूट नहीं अभी तक सहारनपुर और मुजफ्फरनगर के बीच चलने वाली बसों की भी यही हालत होती रही। सहारनपुर और देहरादून के बीच चलने वाली बसों की हालत भी यही हो गई। सबसे अधिक खराब हालत सहारनपुर से आगरा रूट पर चलने वाली बसों की हुई है। हालांकि पिछले एक दो साल से इस रूट में काफी सुधार होना बताया जा रहा है। जबकि सहारनपुर के कस्बे एवं देहात के रूटों पर सड़कों की हालत और भी खराब है।
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ईंधन की खपत बढ़ रही
खराब सड़कों पर वाहनों की ईंधन की खपत पर दस प्रतिशत तक अधिक खर्च हो रहा है। रोडवेज के मानकों के अनुसार साढ़े तीन सौ से चार सौ किलोमीटर बस के चलने पर पांच सौ रुपये से अधिक का डीजल निर्धारित से अतिरिक्त खर्च हो रहा है। रोडवेज के अधिकारियों के अनुसार एक बस रोजाना औसतन पांच सौ किलोमीटर चल रही है। सहारनपुर डिपो की 70 से अधिक बसें चल रहीं हैं। अधिकारियों के अनुमानित आंकड़ों के अनुसार खराब सड़कों के चलते हर माह लगभग 10 लाख रुपये का अतिरिक्त ईंधन खर्च करना पड़ रहा है।
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हर बार करनी पड़ती है मरम्मत
उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक जगदीश सिंह का कहना है कि सड़कों में गहरे गड्ढों के चलते वाहनों की गति तो कम हो ही रही है, एक बार इन रूटों पर चलने के बाद वाहन की मरम्मत करानी ही पड़ रही है। सही रास्ते पर 40 हजार किलोमीटर के बाद बस की मेंटीनेंस कराई जाती है। लेकिन यहां तो 20 हजार किलोमीटर चलना भी मुश्किल हो गया है। देहरादून और शामली रूटों पर तो कई बार दस हजार केे बाद ही मेंटीनेंस करानी पड़ रही है।
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सड़कों के गड्ढों ने बसों के कर दिए पेच ढीले
सहारनपुर डिपो की कार्यशाला प्रभारी फोरमैन विष्णु कुमार का कहना है कि सहारनपुर की सड़कों ने नई बसों तक के पेंच ढीले कर दिए हैं। खराब सड़कों के कारण बसों के टायर खराब हो रहे, गेयर बाक्स खराब हो रहा, क्लच प्लेट में खराबी आ रही, बसों की कमानी टूट रहीं हैं, बसों की खिड़कियों के पेंच ढीले होने से आवाज आने लगी है, बस की बॉडी हिल जाने के कारण ही बसों की छतों के पेंच ढीले होकर जगह हो गई, जिससे बारिश का पानी बसों की छतों से टपक रहा है। इस साल हालत अधिक खराब हुई है। पिछले साल तक सिर्फ तीन चार बसों से ही पानी टपकता था। लेकिन इस साल तो नई बसों की चूलें भी हिल गईं हैं। 20 से अधिक बसों की छतों पर तिरपाल लगवाना पड़ा है।
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