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किसानों की बजाए चीनी मिलों को होगा इस पैकेज का फायदा

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सहारनपुर। यूपी में उप चुनाव में हुई हार के बाद केंद्र की मोदी सरकार द्वारा चीनी उद्योग के लिए 8500 करोड़ रुपये के पैकेज को किसान संगठन नाकाफी बता रहे हैं। उनका कहना कि इस पैकेज से किसानों को नहीं शुगर इंडस्ट्रीज को फायदा होने वाला है। किसान नेताओं ने कहा कि पैकेज में मात्र 1540 करोड़ रुपये बकाया गन्ना मूल्य के लिए रखे गए हैं, जो बेहद कम है। उन्होंने चीनी उद्योग को बचाने के लिए चीनी से जीएसटी हटाने की मांग की है।
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केंद्र सरकार का यह पैकेज किसानों के नाम पर शुगर मिलों को दिया जा रहा है। यह सिर्फ चुनावी स्टंट है। इसका लाभ केवल मिलों को ही होगा। जो धनराशि बकाया भुगतान के लिए रखी गई है वह ऊंट के मुंह में जीरा के समान है। किसानों ने शुगर मिलों को अपना खून पसीना बहाकर पैदा किया गया गन्ना बेच रखा है। सरकार को बकाया भुगतान के लिए कदम उठाना चाहिए।
------- योगेश दहिया, अध्यक्ष फारमर्स फोरम, एवं सदस्य राष्ट्रीय कार्य परिषद आम आदमी पार्टी।
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इस पैकेज में किसानों की बजाए शुगर मिलों का ध्यान रखा गया है। इससे बेहतर केंद्र सरकार मिलों को लोन देकर किसानों का बकाया भुगतान कराती तो अच्छा था। सरकार को किसानों की कतई चिंता नहीं है। इस पैकेज का सीधा फायदा मिल संचालकों को मिलेगा।
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-- चौधरी विनय कुमार, प्रदेश उपाध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन।
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केंद्र सरकार ने 8500 करोड़ रुपये का पैकेज देकर बकाया भुगतान की दिशा में एक गम्भीर कदम उठाया है। इसका परोक्ष रुप से फायदा किसानों को ही होगा। उनका मानना है कि केंद्र सरकार को चीनी को जीएसटी के दायरे से बाहर रखना चाहिए।
----श्यामवीर त्यागी, प्रांतीय अध्यक्ष भारतीय किसान संघ।
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इस पूरे पैकेज का फायदा किसानों से ज्यादा शुगर लाबी को होगा। यदि सरकार को गन्ना किसानों की परवाह होती तो वह तत्काल बकाया गन्ना मूल्य का मय ब्याज भुगतान कराती। केंद्र सरकार पैकेज के नाम पर सिर्फ आंकडेबाजी कर रही है। इसका धरातल पर कोई असर नहीं होगा।
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---भगत सिंह वर्मा, किसान नेता एवं अध्यक्ष पश्चिम प्रदेश मुक्ति मोर्चा।
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