शब-ए-कद्र की रात जागकर करें इबादत
देवबंद। दारुल उलूम वक्फ के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर ने कहा कि शब-ए-कद्र बड़ी मुबारक रात है। कुरआन पाक में पूरी एक सूरत इस रात की फजीलत में नाजिल हुई है और उसमें शब-ए-कद्र की रात को एक हजार रातों से अफजल करार दिया गया है।
पवित्र रमजान माह की अहमियत पर रोशनी डालते हुए मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर ने कहा कि शब-ए-कद्र को लैयलतुल कद्र इसीलिए कहा जाता है कि इसे दूसरी रातों के मुकाबले में शफ और अजमत हासिल है। इस रात में तमाम उम्मत के लिए जो कुछ तकदीर में लिखा हुआ है उसे अल्लाह की तरफ से दिया जाता है। उन्होंने कहा कि कुरआन पाक में शब-ए-कद्र की चार फजीलतें बयान की गई हैं। नंबर एक इस रात में कुरआन पाक नाजिल हुआ, नंबर दो ये रात हजार महीनों से अफजल है, नंबर तीन इस रात में फरिश्ते उतरते हैं और नंबर चार इस रात में सुबह सादिक तक खैर व बरकत और अमन व सलामती की बारिश होती है। मौलाना नसीम अख्तर शाह ने कहा कि शब-ए-कद्र रमजान के आखिरी अशरे (अंतिम दस दिन) में होती है। उन दस रातकों में से खास ताक रातें यानी 21, 23, 25, 27 व 29 की होती हैं। लेकि हर रमजान में यह बदलती भी रहती है। उन्होंने कहा कि ये रात साल में सिर्फ एक बार आती है इस रात की बरकतों से महरुम रह जाना बड़ी बदनसीबी है। इसलिए सभी लोगों को चाहिए कि व शब-ए-कद्र में सिर्फ जागकर अपना वक्त खराब न करें बल्कि ज्यादा से ज्यादा अल्लाह की इबादत करें।