सहारनपुर। बदलते मौसम की मार गेेहूं की गुणवत्ता पर पड़ गई है। सहारनपुर मंडल के तीनों जिलों में लिए गए 13 किसानों के नमूने के आधार पर करीब 43 प्रतिशत लक्सचर लॉस सामने आया है। इसके चलते सरकारी क्रय केंद्रों पर खरीदे गए गेहूं को गोदामों में लेने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। संभागीय खाद्य नियंत्रक ने जांच रिपोर्ट को खाद्य आयुक्त को भेजते हुए लक्सचर लॉस से प्रभावित गेहूं में गुणवत्ता में छूट कराने की मांग की। हालांकि सरकारी क्रय केंद्रों पर गुणवत्ता में छूट की प्रत्याशा में गेहूं की खरीद प्रभावित नहीं हुई है। जिले में अब तक 244782 क्विंटल गेहूं खरीदा जा चुका है जो गत वर्ष की तुलना में अधिक है।
अप्रैल ओर मई में तीन बार हुई बारिश से न सिर्फ गेहूं की कटाई प्रभावित हुई है बल्कि उसकी गुणवत्ता पर भी इसका असर पड़ा है। इससे गेहूं में लक्सचर लॉस यानि चमक से लेकर उसकी स्टोरेज क्षमता भी प्रभावित हुई। हालांकि इस व्यवस्था को सुचारु कर लिया गया है। इस पर संभागीय खाद्य विपणन अधिकारी और शामली और मुजफ्फरनगर के जिला खाद्य विपणन अधिकारी द्वारा भारतीय खाद्य निगम के अधिकारियों के साथ संयुक्त रूप से नमूने लेकर जांच की गई। जिनके विश्लेषण करने पर लक्सचर लॉस के प्रतिशत का पता चला है।
क्या होता है लक्सचर लॉस
गेहूं के बारिश में भीगने से उसके ऊपर की परत चमक विहीन और कमजोर हो जाती है। इसे लक्सचर लॉस कहते हैं। संभागीय खाद्य नियंत्रक के मुुताबिक इससे गेहूं की स्टोरेज क्षमता भी प्रभावित होती है। इसलिए गोदामों में इसे अलग रखा जाता है। बाजार में सबसे पहले इस गेहूं को सप्लाई किया जाएगा।
लक्सचर लॉस वाले गेहूं की स्टोरेज क्षमता प्रभावित होती है। इस प्रकार के गेहूं को लेने में गोदाम वाले परेशान करते हैं। शासन स्तर से कराई गई जांच में मंडल के सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और शामली के गेहूं में लक्सचर लॉस सामने आया है। इसकी रिपोर्ट भेजकर खाद्य आयुक्त से गुणवत्ता में छूट की मांग की गई है। हालांकि लक्सचर लॉस वाले गेहूं को गोदामों में रखने में छूट की प्रत्याशा में कोई परेशानी नहीं हो रही है। इसके चलते गेेहूं की सरकारी खरीद पर इसका कोई असर नहीं पड़ा है।
- सरयु प्रसाद, संभागीय खाद्य नियंत्रक।