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कारागार नहीं संस्कारगृह है जेल - मंडलायुक्त

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सहारनपुर। मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने कहा है कि जेल को सजा के नजरिए से नहीं बल्कि सुधारात्मक नजरिए से देखा जाना चाहिए। कार्यक्रमों के आयोजनों से बंदियों का तनाव दूर होता है। ऐसे में इसे कारागार नहीं बल्कि संस्कार गृह कहा जाना चाहिए।
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शुक्रवार को जिला कारागार में आयोजित शीतकालीन ओलंपियाड-2017 के समापन के अवसर पर उन्होंने जेल अधिकारियों की ओलंपियाड के आयोजन पर सराहना की। उन्होंने कहा कि जेल के अंदर ऐसे आयोजन होते रहने चाहिये, जिससे स्वस्थ परंपरा क़ायम रहेगी। प्रतियोगिता के अंतिम दिन रस्साकशी प्रतियोगिता का फाइनल मैच खेला गया। फाइनल मैच बैरक नंबर 1 एवं बैरक नंबर 8 की टीमों के बीच खेला गया। टॉस बैरक नंबर 1 के कप्तान आदेश ने जीता। मैच में बैरक नंबर 1 की टीम ने बैरक नंबर 8 की टीम को 3-1 से हराकर फाइनल पर अपना नाम लिखा लिया। जिला कारागार अधीक्षक वीरेश राज शर्मा, जेलर राजीव कुमार मिश्रा के द्वारा आयोजित कराए गए ओलंपियाड में कुल 10 स्पर्धाओं में 177 कैदियों ने अपना दमखम दिखाया। मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने नीर-आदेश को प्लेयर ऑफ द जेल का पुरस्कार प्रदान किया। जबकि बैरक संख्या 8 ने ओलंपियाड-2017 की शील्ड जीती। इसके अलावा विभिन्न प्रतियोगिताओं में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान पर रहे विजेताओं को भी शील्ड प्रदान कर सम्मानित किया गया। राष्ट्रीय निशानेबाज फैसल खान ने कहा कि खेलों से ही हमारी धरती जानी जाती है। बंदियों को लगातार अपनी फिटनेस को क़ायम रखने के लिए खेलते रहना चाहिए।
जेल अधीक्षक डाक्टर वीरेश राज शर्मा ने कहा कि जेल और समाज को जोड़ने का प्रयास जारी रहेगा। समाज के सहयोग से इस प्रकार के सकारात्मक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता रहेगा। शीघ्र ही जेल में जन सहयोग से एक पुस्तकालय की स्थापना की जाएगी।
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इस मौके पर जेलर राजीव मिश्रा, डिप्टी जेलर केके दीक्षित, हिमांशु रौतेला, गौरव, नजम खान मौजूद रहे।
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