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जच्चा-बच्चा के रोगों के उपचार पर किया मंथन

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सहारनपुर। भारत में प्रति वर्ष तीन लाख बच्चे समय से पहले पैदा होने की वजह से दम तोड़ देते हैं, जबकि विश्व में समय से पहले पैदा होने वाले बच्चों के मरने का यह आंकड़ा दस लाख है, जो चिंता की बात है। यह जानकारी गुरुग्राम से आईं डॉ. रागिनी अग्रवाल ने दी। वह सहारनपुर ऑब्स और गायनी सोसायटी की ओर से रविवार को आयोजित सीएमई कार्यशाला में अपनी बात रख रही थी।
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डॉ. रागिनी ने बच्चों के समय से पहले पैदा होने की कई वजह बताई हैं, जिनमें अनुवांशिक, महिला का धूम्रपान करना, असंतुलित डाइट लेना, शरीर में इंफेक्शन होना, महिला का डिप्रेशन में होना, बच्चों का जुड़वां होना आदि शामिल हैं। एम्स नई दिल्ली से आईं प्रोफेसर डॉ. नूतन अग्रवाल ने कहा कि यदि समय से आईयूजीआर को पहचान लिया जाए तो बच्चे के विकास को समय रहते बढ़ाया जा सकता है। फोग्सी की दीपा अनेजा ने कहा कि सहारनपुर में इस तरह की सीएमई होती रहनी चाहिए। सचिव डॉ. पूजा ने सभी मेहमान चिकित्सकों का आभार जताया। साइंटिफिक सेक्रेटरी डॉ. नैना मिगलानी ने कहा कि इस तरह की कार्यशालाओं से चिकित्सा के क्षेत्र में होने वाले नए शोध और नए उपचार का आदान प्रदान होता है। इससे पहले कार्यशाला का उद्घाटन महिला अस्पताल की पूर्व अधीक्षक डॉ. ममता सोढ़ी, एम्स नई दिल्ली की डॉ. नूतन अग्रवाल, डॉ. सविता चौपड़ा, डॉ. रागिनी अग्रवाल, डॉ. दीपा अनेजा, डॉ. पूजा खन्ना, डॉ. नैना मिगलानी और आईएमए के अध्यक्ष डॉ. रविंद्र राणा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान डॉ. सीमा अग्रवाल, डॉ. इंदिरा भार्गव, डॉ. पूनम मखीजा, डॉ. अनीता मलिक, डॉ. रेनू अग्रवाल, डॉ. चित्रा मनचंदा, डॉ. विनीता मल्होत्रा, डॉ. नूतन उपाध्याय, डॉ. भल्ला, डॉ. इंदिरा सिंह, डॉ. दीपशिखा, डॉ. रेनू सिंघल, डॉ. गीता खन्ना, डॉ. ऐश्वर्या, डॉ. राजेश शर्मा, डॉ. प्रशांत खन्ना आदि मौजूद रहे।
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