साढ़ौली कदीम (सहारनपुर)। पिछले चार वर्षों से बंद पड़ी क्षेत्र की चीनी मिल पर योगी सरकार के आदेशों का भी कोई असर नहीं दिखाई दे रहा है। आगामी पेराई सत्र को लेकर मिल क्षेत्र में अभी कोई हलचल देखने को नहीं मिल पा रही है।
गौरतलब है कि प्रदेश में सरकार बनने के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री ने बंद पड़ी चीनी मिलों को चलाए जाने का आदेश दिया था। लेकिन शाकंभरी शुगर एंड एलाइड इंडस्ट्रीज लिमिटेड टोडरपुर के प्रबंधकों पर इनका कोई असर नहीं हुआ। बता दें गत वर्ष क्षेत्र के 356 गांवों के किसानों ने मिल गेट पर लंबे समय तक सांकेतिक एवं आमरण अनशन कर संघर्ष किया। इस दौरान कई बार बुजुर्ग किसानों की हालत बिगड़ी। प्रशासन ने भारी बल प्रयोग कर किसानों को चिकित्सालय में भर्ती करा चिकित्सा मुहैया कराई। बाद में नए मिल प्रबंधन के रूप में कुछ चेहरे सामने आये तथा टोडरपुर एग्रो के नये नाम से मिल संचालन कराए जाने का आश्वासन दिया। नया मिल प्रबंधन लगातार मिल चालू कराने की घोषणा करता रहा, लेकिन सत्र समाप्ति तक भी मिल चालू नहीं कराई जा सकी। सत्र समाप्ति के कुछ दिन बाद ही नए प्रबंधन के सभी कर्मचारी मिल प्रांगण से नदारद ही हो गए। वर्तमान में नए मिल प्रबंधन का कोई भी अधिकारी मिल में उपलब्ध नहीं है। न ही मिल के संबंध में फोन पर कोई बयान देने को तैयार है।
वर्तमान में जब अन्य चीनी मिलें अपने क्षेत्रों में गन्ने का सर्वे कराने का कार्य कर रही है तो टोडरपुर मिल के गन्ना विभाग पर लंबे समय से ताले लटके हैं। टोडरपुर एग्रो के गन्ना महाप्रबंधक आरएस ग्रेवाल, उप प्रबंधक बिष्ट, मिल महाप्रबंधक पवन सिंह ढींगरा सहित कोई भी मिल अधिकारी आगामी सत्र में मिल चलाये जाने को लेकर फोन पर भी किसी भी तरह का बयान देने को तैयार नहीं है।
किसान चौ. रामपाल सिंह, दर्शनलाल काम्बोज, बिरमपाल सिंह, शंभूराम, चमेल सिंह सैनी, रणवीर सिंह, नारायण सिंह, शिकलचंद, सुरेशपाल, योगेंद्र सिंह, पद्म प्रकाश शर्मा, सतीश शर्मा, गन्ना समिति बेहट के पूर्व चेयरमैन चौ. ताहिर, हाजी मुकर्रम, हाजी खुर्शीद, आमिर चौहान, आकिल आदि का कहना है कि क्षेत्र के विकास के लिए मिल को चालू कराया जाना आवश्यक है। किसानों को सूबे के मुख्यमंत्री से उम्मीद है कि जनपद आगमन पर वे क्षेत्र की इस समस्या से निजात दिलाने का कार्य करेंगे।