‘सच्चे मन से तौबा करने पर माफ होते हैं गुनाह’
सहारनपुर। जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक एवं इमाम कारी इसहाक गोरा ने हेल्पलाईन के जरिए बताया कि जकात मजहब-ए-इस्लाम में मालदार व्यक्ति पर फर्ज होती है। लेकिन उसका बालिग और आकिल होना जरूरी है। जकात ही एक ऐसा माध्यम है, जिससे असहाय, यतीम बच्चों, विधवाओं, विकलांगों और गरीब लोगों की मदद की जा सकती है।
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सवाल:- मोहल्ला कुतुबशेर निवासी अजरा सुल्ताना ने मालूम किया कि शरीयत के अनुसार किसी व्यक्ति पर जकात फर्ज होने की क्या शर्तें हैं।
जवाब:- इस्लाम में जकात फर्ज होने की खास चार शर्तें हैं। इनमें व्यक्ति का इस्लाम में होना, निसाब का पूरा होना और उसमें साल गुजर जाना एवं आकिल तथा बालिग होना।
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सवाल:- मोहल्ला आली निवासी अल्तमश ने पूछा कि उनकी नाक में बहुत खुशकी रहती है और वह नाक में तेल डालते हैं। इससे रोजा तो नहीं टूटेगा।
जवाब:- शरीयत के मुताबिक रोजे की हालत में नाक में तेल डालने से रोजा टूट जाता है। चाहे किसी मजबूरी की वजह से ही क्यों न हो।