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‘भगवान को धन दौलत से नहीं भक्ति से पाया जाता है’

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साढ़ौली कदीम (सहारनपुर)। सच्चे मन से की गयी मुराद को भगवान हमेशा पूरा करते हुए हैं। भगवान को धन दौलत से नहीं भक्ति के भाव के पाया जा सकता है।
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शुक्रवार को सिद्धपीठ श्री हनुमान मंदिर कम्बोहमजरा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में बोलते हुए कथावाचक पंडित संजय प्रपन्नाचार्य ने कहा कि भगवान भक्त का भाव देखते हैं क्योंकि भगवान के दरबार में सभी तरह की श्रद्धा के श्रद्धालु पहुंचते हैं। भगवान की प्रत्येक लीला मानव के लिए शिक्षा प्रेरित होती है। श्रीकृष्ण भगवान की बाल लीलाओं में प्रमुख लीलाएं सामाजिक समरसता और एकता के साथ साथ घर की उत्पादित वस्तुओं पर पहले बच्चों का फिर उत्पन्न करने वालों का अधिकार बताया गया है। श्रीकृष्ण भगवान के पिता नंद जी के यहां नौ लाख गायों की संख्या थी। उस समय गायों की संख्या अनुसार ग्वाला, गोप, उपनंद, नंद, भानु, वृषभानु आदि भिन्न भिन्न पद दिए जाते थे। श्रीकृष्ण भगवान ने जब देखा कि सभी गोप ग्वाल समस्त माखन, घी और दही बेचकर भी राजा कंस के कर को नहीं चुका पाते थे और गोप ग्वाल व उनके परिवार को दूध, दही, घी खाने को नहीं मिल पाता था जिससे वे कुपोषण का शिकार होते जा रहे थे तो भगवान ने माखन चोरी कर सभी को माखन खिलाना शुरू किया। गोवर्धन लीला के माध्यम से प्रकृति का संरक्षण और संवर्धन की शिक्षा दी गयी है। मंदिर के मंहत संतोषदास महाराज, बिजेंद्र कांबोज, कुशलपाल सिंह, संदीप कुमार, रजनीश कुमार, प्रेमसिंह, कार्तिक, मा. प्रीती सिंह, हार्दिक, सुखपाल सिंह, नरेश कुमार, नितिन, मुकुल, सुखदेव सिंह रहे।
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