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मनुष्य के जीवन में होता है दो वाटिकाओं का समागम

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सहारनपुर। पंजाबी बाग में चल रही श्रीराम कथा के दौरान आचार्य अनिल हटवाल ने कहा कि मनुष्य के जीवन में दो वाटिकाओं का समागम होता है। उन्होंने जानकी माता द्वारा किए गोरी पूजन की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम और लक्ष्मण पुष्प वाटिका में प्रवेश करते हैं तो सारी कलियां खिल उठती हैं। सब कलियां चाहती हैं कि भगवान उन्हें चुने। हर पुष्प भगवान की सुंदर छवि को निहारने लगे। हंस, पपीहा, चातक और मोर भगवान को देखने लगे। मोर ने नाच-नाचकर अपने पंख फैला लिए। वहां से प्रभु मां गौरी का आशीर्वाद प्राप्त कर गुरु विश्वामित्र के पास पहुंचे। प्रभु श्रीराम ने सारी घटना गुरुदेव को बताई। यहां से प्रभु गुरु का आशीर्वाद लेकर उनके साथ विदहनगर सीता माता के स्वयंवर में पहुंचे, जहां प्रभु की सुंदर छवि को सब निहारने लगे। स्वयंवर में बड़े-बड़े राजा भगवान शिव के धनुष को हिला नहीं सके। तब राजा जनक ने कहा कि धरती वीरों से विहीन है। इस पर प्रभु श्रीराम ने गुरु का आशीर्वाद लेकर एक ही क्षण में धनुष को खंडित कर दिया। माता जानकी ने प्रभु को जयमाला पहनाई तो सभी भाव विभोर हो गए। कथा के दौरान शिवानंद, योगेश शर्मा, महिपाल, बुद्ध सिंह, प्रदीप, प्रमोद, यशपाल, चंद्रपाल सतीश, सुरेंद्र, अरुण, प्रवीन मौजूद रहे।
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