सहारनपुर। जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक व इमाम कारी इसहाक गोरा ने हेल्पलाइन के जरिए रोजेदारों के सवालों के जवाब दिए। उन्होंने कहा कि माह-ए-रमजान भूख और प्यास की शिद्दत बर्दाश्त करने की सीख देते हुए इंसानियत का पैगाम देता है। रोजा हमें रूहानी ही नहीं जिस्मानी ऐतबार से भी मजबूत बनाता है।
सवाल:- गांव हबीबगढ़ निवासी उमर ने पूछा कि उनके सिर में एलर्जी है। डाक्टर ने दही के साथ दवा लगाने को कहा है। इससे उनका रोजा तो खत्म नहीं हो जाएगा।
जवाब:- यदि कोई व्यक्ति रोजे की हालत में सिर पर दही या दवा लगता है तो उससे रोजे पर कोई असर नहीं आएगा। रोजा पूरी तरह सलामत रहेगा।
सवाल:- गांव रमजानपुरा निवासी अली ने पूछा कि वह बाइक से जा रहे थे कि अचानक उनके मुंह में मच्छर आ गया और वह पेट में चला गया। अब ऐसी सूरत में उनका रोजा रहा या नहीं।
जवाब:- शरीयत में आया है कि यदि कोई व्यक्ति रोजे की हालत में हो और बिना इख्तियार कोई मक्खी या मच्छर मुंह से हलक वे पेट में उतर जाए तो इससे रोजा नहीं टूटता।