शाकंभरी (सहारनपुर)। सिद्धपीठ श्री शाकंभरी देवी में सोमवार को मां शाकंभरी देवी जयंती उत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। अपराजिता मां शाकंभरी देवी शतचंडी महायज्ञ में पूर्णाहुति के बाद मां भगवती को शंकराचार्य आश्रम के व्यवस्थापक सिद्ध भैरवातंत्राचार्य महंत सहजानंद ब्रह्मचारी द्वारा संत समाज के साथ छप्पन भोग एवं 36 व्यंजनों के भोग अर्पण किए जाएंगे। उत्सव की तैयारियों के मद्देनजर सिद्धपीठ परिक्षेत्र में स्थित शंकराचार्य आश्रम की भव्य सजावट की गई है। उधर, मां शाकंभरी देवी मंदिर को भी भव्य रूप दिया गया है। शंकराचार्य आश्रम में उत्सव की तैयारियां पूरी कर ली गई है। व्यवस्थापक महंत सहजानंद ब्रह्मचारी ने बताया कि सोमवार की सुबह प्रात: 10 बजे आश्रम में चल रहे अपराजिता मां शाकंभरी देवी शतचंडी महायज्ञ में पूर्णाहुति के बाद मां भगवती को छप्पन भोग एवं 36 व्यंजन अर्पण किए जाएंगे। जयंती उत्सव में शामिल होने के लिए देशभर से साधु संत आश्रम में पहुंच चुके हैं। उन्होंने कहा कि माता को भोग अर्पण किए जाने के बाद आश्रम में भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
पौष मास में आराधना का विशेष महत्व
शाकंभरी। पौष मास में मां शाकंभरी देवी की आराधना का विशेष महत्व। शंकराचार्य आश्रम के व्यवस्थापक सिद्ध भैरवातंत्राचार्य महंत सहजानंद ब्रह्मचारी ने बताया कि मां शाकंभरी करुणामयी और ममतामयी है। आराधना करने से मां शीघ्र प्रसन्न होती है और अपने भक्तों के दु:खों को नष्ट कर उन्हें सुख शांति प्रदान करती है। मां शाकंभरी की उत्पत्ति के विषय में देवी भागवत महा पुराण में कहा गया है कि दुर्गम नामक दैत्य के अत्याचारों से पृथ्वी पर हाहाकर मच गया एवं समस्त धार्मिक कार्य जप, तप, पूजा, पाठ, यज्ञ इत्यादि सब लुप्त हो गए, जिसके करण पृथ्वी पर 100 वर्षों तक वर्षा नहीं हुई, जिससे पृथ्वी पर अकाल पड़ गया। जल, अन्न, वनस्पति आदि की पैदावार नहीं हो पाई। इस कारण स्वरूप पृथ्वी पर मानव, जीव, जंतु, पशु, पक्षी भूख प्यास से मरने लगे। करुणामयी मां के सौ नेत्रों से अश्रु बहने लगे, जिसके फलस्वरूप मां का नाम शताक्षी पड़ा। माने संपूर्ण भूमंडल पर समस्त क्षत्रियों की उत्पत्ति की, जिसके परिणाम स्वरूप मां का नाम शाकंभरी हुआ। इसी रूप में भगवती ने दुर्गम नामक दैत्य का वध किया, जिससे उनका नाम दुर्गा हुआ। इसी रूम में मां ने भीमासुर दैत्य का वध किया, जिससे मां का नाम भीमा देवी और भ्रमर दैत्य का वध करने से मां का नाम भ्रामरी देवी हुआ। मां के ये चारों शक्ति रूप मां शाकंभरी देवी मंदिर में स्थापित है। शास्त्रों में वर्णित है, कि मां शाकंभरी का पौष मास की पूर्णिमा तिथि को प्रकाटय हुआ था, इसलिए प्रतिवर्ष पौष मास की पूर्णिमा को मां शाकंभरी देवी की जयंती मनाई जाती है।