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आखिर वीर सैनिकों का ताबूतों में बंद होकर लौटना कब होगा बंद

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बड़गांव (सहारनपुर)। पुलवामा में पाक के कायराना हमले में जवानों की शहादत की खबर सुनते ही क्षेत्र में शहीद हुए जवानों के परिजनों के जख्म एक बार फिर हरे हो गए हैं। नया गांव निवासी शहीद वेदप्रकाश सिंह की पत्नी मितलेश का दर्द छलका तो उसने कहा कि उसे ही पता है कि पति के शहीद होने का दर्द क्या होता है। उनका कहना है कि आखिर कब तक उनकी तरह ऐसी कई बहनों के मांग के सिंदूर उजड़ते रहेंगे। अब हिंदुस्तान को अपने दुश्मनों को खत्म करना ही होगा। वक्त आ गया है कि भारत सरकार पाक के साथ अब आर पार की जंग का शीघ्र ऐलान करे। मितलेश के पति वेदप्रकाश सिंह वर्ष 2003 में 9 अगस्त को सियाचीन सेक्टर में एक आपरेशन के दौरान मातृभूमि रक्षा के लिये दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए थे। अमर उजाला से टेलीफोन पर वार्ता करते हुए शहीद की पत्नी मितलेश की आंखें छलक गई और गला भर आया। उन्होंने कहा वह अच्छी तरह से समझती हैं कि पति की शहादत का दर्द क्या होता है। अब दुश्मनों की कायराना हरकतों से 42 शहादतों में किसी ने भाई खोया तो किसी ने बेटा। कितनी महिलाओं के मांग का सिंदूर ही उजड़ गया। आखिर पाक की कायराना हरकतों का यह सिलसिला कब रुकेगा। अब तो हर हाल में दुश्मनों का खात्मा करना ही होगा और हिंदुस्तान को आर पार की जंग का ऐलान करते हुए अपने जवानों की शहादत का बदला खून के बदले खून से लेना चाहिए।
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