निगम को सौ से अधिक कार्यों के लिए ठेकेदार नहीं मिले
सहारनपुर। नगर निगम की विकास योजनाएं धरातल पर नहीं उतर पा रही हैं। इसकी एक प्रमुख वजह सौ से अधिक कार्यों के लिए नगर निगम को ठेकेदार न मिलना भी है। ऐसे हालात में नगर निगम री-टेंडरिंग की तैयारी में है। इस हालात में बाहर से भी ठेकेदारों केे आमंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
शहर के विकास की योजनाओं के लिए नगर निगम ने टेंडर प्रक्रिया शुरू की थी। मगर हैरत की बात कि सौ से अधिक विकास कार्यों के लिए किसी भी ठेकेदार ने काम करने की इच्छा नहीं जताई। ठेकेदारों के न आने से नगर निगम के अफसर हैरान हैं। यही वजह है कि शहर में विकास कार्य होते नजर नहीं आ रहे हैं। विकास कार्यों को शुरू कराने के लिए नगर निगम सौ से अधिक कार्यों की री-टेंडरिंग कराने की तैयारी में जुटा है। सूत्रों ने बताया कि शहर और जनपद से बाहर के ठेकेदारों को भी आमंत्रित किया जा रहा है, जिससे कि निगम को ठेकेदार मिल सकें और विकास कार्यों को शुरू कराया जा सके।
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478 करोड़ की योजनाएं भी अभी तक फेल
24 फरवरी 2018 को हुई नगर निगम बोर्ड की बैठक में शहर के विकास से जुड़ी योजनाओं के लिए 477 करोड़ 84 लाख 55 हजार रुपये के बजट पर मुहर लगी थी। बैठक में 23 में से 21 प्रस्तावों को आंशिक संशोधन कर पास किया गया था। मगर अभी तक ज्यादातर योजनाओं पर काम शुरू नहीं हो सका है। घंटाघर से श्रीराम चौक तक डिवाइडर बनाया जाना था। इस पर अभी तक काम शुरू नहीं हो सका है। कोर्ट रोड पर घंटाघर से कोर्ट रोड ओवरब्रिज तक सड़क निर्माण और फुटपाथ बनाने के काम की गति धीमी है। दिल्ली रोड की हालत भी ऐसी ही है। मातागढ़ में पुरानी पुलिया को तोड़कर नई पुलिया बनाई जानी थी। मगर अभी तक काम शुरू नहीं कराया गया है। गांधी पार्क के पास शौचालय तोड़कर दुकानें बनाई जानी थीं। शौचालय तोड़ दिया गया है, मगर दुकानें नहीं बनी हैं। अन्य कार्यों की हालत भी ऐसी ही है।
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कमिश्नर के निर्देश पर निरस्त हुए ठेके
नालों की सफाई से जुड़े दस ठेकों को कमिश्नर चंद्रप्रकाश त्रिपाठी के निर्देश पर निरस्त किया गया है। गौरतलब है कि 25 जून को हुई बोर्ड की बैठक में हंगामे के कारण प्रस्तावों पर चर्चा नहीं हो सकी थी। बैठक के बाद बसपा पार्षद दल के नेता ने कमिश्नर को शिकायती पत्र सौंपकर महापौर पर मनमाने तरीके से प्रस्तावों को पास करने का आरोप लगाया था। उन्होंने ठेकों में कमीशन लेने के आरोप भी लगाए थे। कमिश्नर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए ऐसे दस ठेकों को निरस्त करने के निर्देश दिए थे, जिसके बाद तीन जुलाई को ठेकों को निरस्त किया गया।
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यह सच है कि सौ कार्यों के लिए कोई टेंडर नहीं आया है। हम री-टेंडरिंग की तैयारी में जुटे हैं। जरूरत पड़ी तो बाहर से भी ठेकेदारों को बुलाया जाएगा। कोशिश यही है कि टेंडर की प्रक्रिया को अतिशीघ्र कंपलीट कराकर विकास कार्यों को जल्द से जल्द शुरू कराया जा सके।
ज्ञानेंद्र सिंह, नगरायुक्त।
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जगदीप कुमार---------