वसीम रिजवी के बयान पर भड़के देवबंदी उलमा
देवबंद (सहारनपुर)। इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम और दूसरे दीनी इदारों को लेकर शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी के विवादित बयान पर देवबंदी उलमा भड़क गए हैं। उलमा का कहना है मीडिया उन्हें इतनी तवज्जों क्यों दे रहा है, ये समझ से परे है। जबकि उनकी बात और गधे की लात दोनों बराबर हैं।
वसीम रिजवी के बयान पर पलटवार करते हुए मदरसा जामिया हुसैनिया के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना मुफ्ती तारिक कासमी ने कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि मीडिया ने वसीम रिजवी को इतनी अहमियत दी हुई है। वरना उनकी क्या औकात की वो मदरसों या हिंदुस्तान के किसी भी मसले के ऊपर कोई टिप्पणी करे। उन्होंने कहा कि जहां तक दारुल उलूम या दूसरे दीनी इदारों की बात है तो मदरसों के दरवाजे चौबीस घंटे हर किसी के लिए खुले हुए हैं। जिसका जब मन चाहे आकर यहां देख सकता है। कहा कि मदरसों में क्या तालीम दी जाती है, क्या जेहन बनाया जाता है, मदरसों में पढ़ने वाले छात्र और पढ़ाने वाले उस्ताद सभी एक खुली किताबें है। इसलिए हमें किसी को सफाई देने की जरूरत नहीं है। हमारा किरदार ही हमारी सबसे बड़ी सफाई है। इसलिए उलमा के ऊपर दहशतगर्दी का इल्जाम लगाना फिजूल है। इल्जाम लगाने वाले या सरकार के नुमाइंदे यहां आकर खुद देखें या खुफिया तरीके से मदरसों की जांच करा लें। साफ हो जाएगा कि हिंदुस्तान की साख बचाने के लिए उलमा का वजूद है। मुफ्ती तारिक ने कहा कि अगर सरकार ऐसे सिरफिरे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं करती तो मुल्क की हिंदु-मुस्लिम एकता को टूटने से कोई नहीं बचा पाएगा।