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बाबा श्री जाहरवीर की शाम में बसेरों की धूम--

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सहारनपुर। श्री जाहरवीर गोगा की म्हाड़ी पर लगने वाला मेला सहारनपुर की पहचान और सांप्रदायिक एकता का प्रतीक है। जिले और पड़ोसी राज्यों से भादों में शुक्ल पक्ष की दशमी के दिन लाखों श्रद्धालु म्हाड़ी पर पहुंचकर निशान चढ़ाकर मन्न्त मांगते हैं। इन दिनों बाबा श्री जाहरवीर की शान में जगह-जगह बसेरों का आयोजन किया जा रहा है। शहर में रंग-बिरंगी छड़ियां भ्रमण कर रही हैं। जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना हुआ है।
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शहर से करीब तीन किलोमीटर दूर गंगोह रोड स्थित म्हाड़ी पर इस वर्ष मेले की शुरूआत 31 अगस्त को शुक्ल पक्ष की दशमी पर होगी। दो सप्ताह तक शहर में भ्रमण करने और बसेरों के बाद श्री जाहरवीर गोगा के प्रमुख चिन्ह नेजा सहित 26 छड़ियां बैंडबाजों संग विभिन्न इलाकों से होती हुई विश्रामपुरी काल भैरव मंदिर पहुंचेगी और यहां से पूजन के उपरांत म्हाड़ी की ओर प्रस्थान कर जाएंगी। म्हाड़ी पर छड़ियों के पहुंचने से पूर्व लाखों की संख्या में श्रद्धालु छड़ियों के इंतजार में मौजूद रहते हैं। जैसी ही छड़ियां अपने स्थलों पर पहुंचती है तो सर्वप्रथम प्रसाद चढ़ाने और मन्नत मांगने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती है। दो दिन म्हाड़ी पर मेला चलने के बाद तीसरे दिन छड़ियां वापस अपने-अपने स्थानों पर प्रस्थान करती हैं। इन दिनों मेले से पूर्व बाबा श्री जाहरवीर की शान में जगह-जगह बसेरों और जागरण का आयोजन किया जा रहा है। रात के समय छड़ियों के भक्त श्रद्धालुओं को बाबा की वीरता के किस्से सुनाते हैं। बसेरों में कढ़ी चावल का प्रसाद वितरित किया जाता है।

कबली भगत को दिया था नेजा
सहारनपुर। छड़ियों के भक्त बताते हैं कि बाबा श्री जाहरवीर गोगा महाराज अक्सर गंगा स्नान के लिए हरिद्वार जाते थे। यात्रा के दौरान वह गंगोह मार्ग पर रुका करते थे। बाबा श्री जाहरवीर ने सैकड़ों वर्ष पूर्व कबली भगत गंगोह मार्ग पर तालाब से मछलियां पकड़े देखा था। तब बाबा ने कबली भगत से कहा था कि वह मछली पकड़ने का काम छोड़कर इस स्थान पर म्हाड़ी बनवाकर पूजा करें। बाबा ने कबली भगत को चांदी का नेजा दिया था। कबली भगत ने बाबा जाहरवीर को अपनी जीविका चलाने की मजबूरी बताई थी। तब बाबा ने कहा था कि यदि वह भादो माह में शुक्ल पक्ष की दशमी को उनके नाम का मेला भरवाए तो उसकी रोजी-रोटी पूरे वर्ष चलती रहेगी। कबली भगत ने उनकी आज्ञा को माना और यहां म्हाड़ी का निर्माण करा दिया। तभी से म्हाड़ी स्थल पर बाबा श्री जाहरवीर की शान में मेला लगता आ रहा है।
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बाबा श्री जाहरवीर का इतिहास
सहारनपुर। बाबा श्री जाहरवीर का जन्म राजस्थान के चुरू जिले के गांव ददरेगा में हुआ था। चुरू जिले का नाम बाद में राजगढ़ हो गया। इनके पिता का नाम जेवर सिंह ओर माता का नाम बाछल था। ये राजा उमर सिंह के वंशज थे। जो अत्यंत बलशाली वीर थे। इनके के पास विशाल सेना थी। दान धर्म में रुचि रखते थे और इनके दर से कोई जरूरत मंद निराश नहीं लौटता था। बताते हैं कि श्री जाहरवीर गोगा के जन्म से पूर्व उनके पिता जेवर सिंह काफी सोच में रहते थे। बाबा गुरु गोरखनाथ ने जेवर सिंह को आशीर्वाद देकर कहा कि तुम्हारे घर ऐसा पुत्र जन्म लेगा, जो दुष्टों का विनाश करेगा और धर्म की रक्षा करेगा। गुरु गोरखनाथ नाथ के आर्शीवाद से माता बाछल ने पुत्र को जन्म दिया, जिनका नाम श्री जाहरवीर रखा गया।
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