सहारनपुर। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के घटक संघों और प्राथमिक शिक्षक संघ की संयुक्त बैठक में पुरानी पेंशन बहाली की मांग दोहराई गई। इतना ही नहीं, वक्ताओं ने कहा कि यदि शिक्षकों और कर्मचारियों को पेंशन नहीं दी जा सकती है तो सांसदों और विधायकों समेत सभी जन प्रतिनिधियों को मिलने वाली पेंशन बंद की जाए।
अध्यक्षता कर रहे सीपी सिंह ने कहा कि शिक्षक हों या फिर कर्मचारी। वह अपने जीवन के 30 से 40 साल सरकारी नौकर के तौर पर सेवा करते हैं, मगर दुर्भाग्य है कि सरकार ने उनकी पेंशन बंद की हुई है। तमाम संग ठन पुरानी पेंशन बहाली की मांग करते आ रहे हैं, मगर सरकारों पर इसका असर नहीं हो रहा है। संदीप सिंह पंवार ने कहा कि सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि चाहे उनका कार्यकाल छह महीने का ही रहा हो। उन्हें पेंशन दी जाती है। यदि सरकार वर्षों तक सेवा करने वाले सरकारी कर्मचारियों को पेंशन नहीं दे सकती है तो उसे सांसदों और विधायकों आदि की भी पेंशन बंद कर देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पुरानी पेंशन बहाली के लिए नौ अगस्त को एक दिवसीय धरना दिया जाएगा। बैठक में विनय मलिक, सरदार सिंह, विनोद कुमार, अरविंद यादव, राजीव यादव, वीके जैन, संजीव कुमार, अशोक मलिक आदि मौजूद रहे।
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पदाधिकारियों को न बनाएं सह समन्वयक
सहारनपुर। यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन उत्तर प्रदेश ने ब्लॉक संसाधन केंद्रों के सह समन्वयक बनाने की प्रक्रिया से शिक्षक संगठन के पदाधिकारियों को अलग रखने की मांग की है। इस संबंध में संगठन के पदाधिकारियों ने बीएसए से मुलाकात की। जिलाध्यक्ष उपेंद्र सिंह और जिला संयोजक नगेंद्र सैनी ने बताया कि सह समन्वयकों की नियुक्ति में अनेक ऐसे शिक्षक भी शामिल हैं, जो शिक्षक संगठनों के पदाधिकारी हैं। संगठन को लगता है कि किसी भी संगठन का पदाधिकारी सह समन्वयक जैसे महत्वपूर्ण पद पर अपने काम के साथ ईमानदारी नहीं रख सकेगा। ऐसे में किसी भी संगठन का पदाधिकारी हो। उसे अलग कर सामान्य शिक्षकों को वरीयता दी जाए।